मौन स्पर्श
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रोको मत
छूने दो देह
हजारों शब्दों को
नकारता है एक चुम्बन |
मौन,
संप्रेषित नहीं हो पाता है
एक स्पर्श
सभी भाषाओं को
बौना कर जाता है |
स्पर्श के साथ हो मौन
फिर कौन भाषा तलाशता है ?
१७/०९/७९
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रोको मत
छूने दो देह
हजारों शब्दों को
नकारता है एक चुम्बन |
मौन,
संप्रेषित नहीं हो पाता है
एक स्पर्श
सभी भाषाओं को
बौना कर जाता है |
स्पर्श के साथ हो मौन
फिर कौन भाषा तलाशता है ?
१७/०९/७९
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