Monday, 30 November 2015

सच तुम सुन न पाओगे
झूठ तुमसे कह न पाउँगा
सच बोलता तो अहंकारी कहलाता
झूठ बोलता तो आत्मग्लानि से भर जाता
न सच बोलूंगा न झूठ
तुम्हारे लिए ताउम्र खामोश रहूंगा |

Saturday, 28 November 2015

देश की इज़्ज़त करना हिन्दू-मुसलमान दोनों को सीखना होगा | आज देश हमारी प्राथमिकताओं में है ही नहीं | देश हमारी प्राथमिकताओं में होता तो धर्म के नाम पर हम कभी यों लामबद्ध नहीं होते, राजनीतिज्ञों की साजिश का हर बार शिकार नहीं होते |
वे बेक़सूर हैं क्योकि 
उनके पास गुनाह करने के कारण मौजूद हैं |

2)
ऐसा पुरुष ख्वाब है ,देना ही जिसका स्वभाव हो |
3)
वे प्रगतिशील हैं,
उनकी प्रगतिशीलता अंधी और बहरी है 
जुबान है लेकिन फिलहाल थकी हुई है
पिछले दिनों असहिष्णुता का राग 
इस बुरी तरह से अलापा है कि
जुबान सहिष्णुता के नशे में सोयी हुई है |


3)
पेरिस में जो हुआ इस्लाम के नाम पर हुआ है,इसका सीधा मतलब है कि इसे मुसलामानों ने ही किया होगा ,या यह मुसलामानों को बदनाम करने की कोई साजिश है ,देश के सेक्युलर बुद्धिजीवी कुछ बोलेंगे या अभिव्यक्ति की आज़ादी का रोना ही रोते रहेंगे |
4)
अपने आँगन में 
दीप जलायें या न जलायें 
अपने भीतर एक दीप जरूर जलायें 
दीपावली पर आपको अनंत शुभकामनायें |
जिन रिश्तों में मित्रता का थोड़ा भी अंश नहीं होता वे स्वाभाविक मौत मर जाते हैं और हम इन रिश्तों की मौत का जश्न मनाते है |

2)
चाँद की फितरत समझ न आती
शीतलता मुझे डराती है
रात के आँचल में
अब नींद नहीं आती है
सोचता हूँ उड़ जाऊं
सूरज के पास चला जाऊं
उसके दरवाजे पर जाने से
अब शर्म मुझे आती है |

3)
मजहबी किताबें 
जुल्म और सितम को हवा देती हैं ?
सच नहीं बदलता 
सूरज के निकलते ही 
सरपट भाग जाता है अन्धेरा, 
प्रेम से अपरिचित 
परम्परा से तो केवल देह को ही जाना है |
बेबुनियाद है आपका डर, देश की आम जनता किसी भी मुसलमान को शक की निगाह से नहीं देखती | असहिष्णुता का मुद्दा चंद सिरफिरे और उनके चाकर बुद्धिजीवियों द्वारा अपने राजनीतिक स्वार्थों को साधने के लिए उछाला जाता है | आज भी बाल मैं सुलेमान से ही कटवाता हूँ और एक भी हिन्दू मुझे नहीं मिला जिसने इस तथाकथित असहिष्णुता के माहौल में सुलेमान से बाल कटवाना बंद कर दिया हो | मटन आज भी जुबैर के यहाँ से ही आता है और उसके भी गाहकों की संख्या में ( इस भीषण असहिष्णुता के माहौल में ) कोई कमी नहीं आयी है | टीवी देखना बंद कर दीजिये आपको भाईचारा के अतिरिक्त कुछ भी नहीं दिखेगा |

2) आज़ादी के बाद हर घर में गांधी,नेहरू ,सुभाष तथा भगत सिंह की तसवीरें दीवार की शोभा बढ़ाती थी |कांग्रेसी शासन के दौरान सुभाष चन्द्र बोस तथा भगत सिंह की तसवीरें गायब हो गयीं | समझ में नहीं आता है कि यह सब कांग्रेस द्वारा योजनाबद्ध तरीके से किया गया या वास्तव में इन क्रांतिकारियों का देश की आज़ादी में कोई योगदान ही नहीं था |
हमारे हिस्से का सुख
तुम्हारे पास है
धीरे-धीरे नोचुंगा
अस्थिपंजर करके छोड़ूंगा |

Tuesday, 17 November 2015

वे बेक़सूर हैं क्योकि
उनके पास गुनाह करने के कारण मौजूद हैं
अभी कुछ दिनों पहले
असहिष्णुता के खिलाफ पुरस्कार वापस करके
संगठित तरीके से आपने अपनी प्रतिक्रिया ही तो व्यक्त की थी
वे प्रतिक्रिया स्वरुप कुछ हत्याएं करते हैं
फिर आप उन्हें किस आधार पर गलत कह सकते हैं ?
अच्छा किया जो आपने चुप रहना चुना  |   

Saturday, 14 November 2015

आ जाना 
लौटकर जल्दी आ जाना 
रिश्तों को इंतज़ार करने की आदत नहीं होती |
कौवों की कांव कांव में 
मुश्किल हो जाता है, कोयल को सुनना 
रंग-भेद ,जाति-भेद और धर्म-भेद का आधार 
रंग और पैदाइश क्यों बना ?
कौवों नें जाल कुछ इस तरह बुना कि
सुरीली और नशीली आवाजें हो गयीं धुवाँ
बहुत मुश्किल है
कौवों की इस भीड़ में कोयल को ढूढ़ना |

Friday, 6 November 2015

रंग बदलने का हुनर उन्हें आता है
उन्हें देखकर गिरगिट शर्माता है  |
धर्म अज़गर है
इंसानियत को निगल जाता है
आदमी के खोल में
चारो तरफ शैतान नज़र आता है |

Tuesday, 3 November 2015

पुरस्कार वापस करने से कुछ नहीं होगा
सत्ता जानती है कि
पुरस्कृत होने के लिए तुम्हें
सत्ता की चौखट पर ही आना है
ऐसे आन्दोलनों से 
सत्ता का पेट भरता है
सत्ता सवालों से घबराती है
लोकतंत्र ज़िंदा रहे
इसलिए करने होंगे सवाल |

Sunday, 1 November 2015

धर्म उत्पात मचा रहा है,
धर्म के नाम पर पाप किया जा रहा है |


2)

नदी के जिस पानी में 
आप डुबकी लगाते हैं 
बाहर आने पर वह पानी नहीं मिलता 
नदी की फितरत में ठहरना नहीं होता |