Saturday, 28 February 2015

मैं फिर कहता हूँ =
सत्ता का कोई विकल्प नहीं होता
सत्ता का चेहरा कभी नहीं बदलता  |
"गुरु"
"गुरुर" से भरे होते हैं
पैर छू-छू कर
उनके गुरुर को हम बढ़ाते है
और बाद में पछताते हैं |
माँ-बाप जिन्होंने हमें जीवन दिया
उन्हें ही क्यों गुरु नहीं मान पाते हैं  |
विपक्ष जब भी परोसता है
स्वादिष्ट खाना ही परोसता है
सत्ता में आते ही
अपनी ही परोसी हुई
स्वादिष्ट खाने की थाली
आपके सामने से खींच लेता है
सत्ता का चेहरा कभी नहीं बदलता दोस्त  |

Friday, 27 February 2015

घर होता है,
परिवार होता है
इनसे अगर थोड़ा वक्त बचा
तो मंदिर में बैठा भगवान होता है
हमारी प्राथमिकताओं में देश का नाम नहीं होता |

Thursday, 26 February 2015

कागज पर लिखा
अपना नाम
फिर लिखा
मेरा घर
मेरा परिवार
और एक अदद कार
देश का नाम लिखना भूल गया

सम्राट,
जिसके पास सेना है
और जो यह जानता भी है कि
केवल अपने बारे में सोचते हैं
देश से नहीं इनका कोई सारोकार
तानाशाह नहीं
हम खुद ही लिखते हैं
अपने सीने पर "राजद्रोही"     
उड़ो आकाश में
उसे भी उड़ने दो
आकाश में घर नहीं बनते
दीवारों के उठने का डर नहीं होता
लेकिन हमारी तो आदत है
जमीन पर घर बनाने की
बेमतलब दीवारें उठाने की |
व्यर्थ ही परेशान हुए न | मैनें कहा था न कि वह तुम्हारी है | अरे भाई औरत कविता से ज्यादा गूढ़ होती है,उसे समझना नामुमकिन है | मैंने जिंदगी में औरत के ऐसे ऐसे रंग देखे हैं कि औरत के प्रति मेरी सारी जिज्ञासा शांत हो चली है |
तमाम मर्दों से सम्बन्ध रखने के बाद भी औरत अपने सीता-सावित्री रूप को बनाये रखना चाहती हैं | औरत के सीता-सावित्री रूप को बनाये रक्खो-उस पर कोई सवाल मत करो |
स्वप्न मत दिखाओ मेरे दोस्त
सपनों से डर लगता है |
वह शातिर खिलाड़ी है तुम्हारे भीतर के पुरुष को भड़का रही है |
मुझे खुद नहीं मालूम कहाँ हूँ
यहां हूँ या वहां हूँ
साहित्य में तो अब यहीं बाकी है
जिसके पास पैसा है उसी के पास साकी है |
आम का सारा रस चूस लिया
फिर उसे फेंक दिया, क्या गुनाह किया
हर औरत  एक अच्छी बिज़नेस वूमेन हैं और सोने पे सुहागा यह कि उसके पास वह चीज़ है जिसका हर पुरुष शौक़ीन है और यह बात वह अच्छी तरह जानती है |
प्रेम के भ्रम में मत पड़ो
अपना काम करो और आगे बढ़ो
अवधूत हो तुम यार।
तुम मेरा बुढ़ापा खराब करके ही मानोगे
दो चार मोर-पंख मेरे मुकुट में भी टाँकोगे
संबधों को आलोचक की दृष्टि से मत देखो गीतकार की दृष्टि से देखो |
प्रेम में
खाली जगहों को
अपने मन मुताबिक़ भरना
होगा तुम्हें सीखना
वह तुम पर भड़की
इसे ऐसा समझो कि
वह तुम्हारे साथ सोने के लिए तड़पी
वह रूठे और कोई उसे मनाये
औरत की यह आदिम ख्वाइश है होती |
जब कोई औरत
किसी के लिए अतिरिक्त प्रेम दिखाए
तो समझना कि वह उस व्यक्ति से दूर जा रही है
उसका तुम पर भड़कना
यह साबित करता है कि वह तुम्हारे करीब आ रही है |
रिश्तों की
ह्त्या करना चाहते हैं ?
तो पहले उन्हें परिभाषित करिये
और उन्हें मर्यादा में बांधिए
फिर हाथ में कटोरा लेकर भीख मांगिये
आकाश में उड़ते हुए पंछी को पिजड़े में डालिये
फिर उसकी मौत पर मातम मनाइये 

Monday, 23 February 2015

जब मैं प्रेम में था
उसकी देह को कन्धों पर उठाकर
हर समय मस्त मैं झूमता था
उन्होनें न जाने कब
मेरे कन्धों से उसकी देह उतारकर
किसी अनजाने के कन्धों पर रख दी
और मेरे कन्धों पर
एक वैकल्पिक देह की व्यवस्था कर दी |
संस्कृति के नाम पर
तमाम विकृतियों को भी ढोते हैं हम |
एक पुरुष( पति ) एक स्त्री ( पत्नी )को
दूसरे पुरुष से बचाने के नाम पर
अपनी अंकशायनी बनाता है
स्त्री को
सुरक्षा प्रदान करने का दम्भ ही तो है
जो पुरुष को बलात्कारी बनाता है |

Sunday, 22 February 2015

1)
मरने से पहले ही 
मर जाते हैं सपने 
कौन है जो कहता है 
मरते नहीं सपने ???
2)
सपने सच नहीं होते
नींद खुलते ही मर जाते हैं
भरोसा मत करना
सपने अपने नहीं होते |
शब्द
रंगहीन होते हैं
गंधहीन होते हैं
शब्दों में स्वादानुसार
रंग और गंध हम भरते हैं
फिर उन्हें पंख देते हैं
आकाश में
उन्मुक्त उड़ने की दिशा
शब्द स्वयं तय करते हैं | 

Wednesday, 18 February 2015

पुस्तक मेले में
अदब की तरक्की देखने जाएंगे
तो हौसला पस्त होगा
यहीं से देखिये
सूरज तो यहाँ भी अस्त होगा  |
प्रेम कभी जवान ही नहीं होता
तो फिर उसके प्रौढ़ होने का
प्रश्न ही कहाँ उठता है  ?
प्रेम अपने बचपन में ही मर जाता है
हाँ प्रेम कभी बूढ़ा नहीं होता  |

Tuesday, 17 February 2015

खुदा
धरती पर उतरता है
चीख-चीखकर कहता है
मैं खुदा हूँ, मैं खुदा हूँ
तुमसे नहीं जुदा हूँ
खुदा से भी पहचान पत्र मांगा गया
खुदा के पास
धरती के किसी भी देश का
कोई पहचान पत्र न होने के कारण
उसे इस जमीं से निकाला गया |

खुदा ने ईश्वर को बहुत समझाया कि
मत जाओ धरती पर यहीं आकाश में रहो
ईश्वर नहीं माना
धरती पर आया
अपने ईश्वर होने का ढिंढोरा पिटवाया
धरती पर लोग चकित थे कि
ईश्वर मंदिर से बाहर कैसे आया ??
पहचानपत्र न दिखा पाने पर
ईश्वर को अपने ही देश से
धक्के मारकर निकाला गया
खुदा सोच रहा था कि
चलो यह बुद्धू भी
मेरी ही तरह लौटकर घर आया |

Friday, 13 February 2015

रास्ते ख़त्म नहीं होते 
हम ही थककर रुक जाते हैं |
झेला था तुमने 
बाबरी मस्जिद के विध्वंस का दंश 
सुधरे नहीं 
फिर राम मंदिर वहीँ बनाने लगे 
हिन्दू-हिन्दू चिल्लाने लगे 
जो मुसलमान-मुसलमान चिल्लाते थे
उनका हश्र था देखा
फिर भी कुछ नहीं सीखा
सोचो अगर हिन्दुओं ने
दस-दस बच्चे पैदा किये होते
तो तुम्हारी हार से
जीत का फासला कितना बड़ा होता ?
जो अल्पसंख्यकों को रिझाते थे डूब गए 
ये अगर बहुसंख्यकों को रिझाते रहे 
हिन्दू-हिन्दू चिल्लाते रहे 
दस-दस बच्चे पैदा करने की गुहार लगाते रहे 
तो निश्चित जानिए ये भी डूब जाएंगे |
किस किस को करू किस 
होंठ जाएंगे घिस 
हैप्पी किस डे कहने के बाद किस करना है 
या किस करने के बाद हैप्पी किस डे कहना है ???????
उनकी झोली में ढेरों सपने है
नये-नये सपने
तुम्हारी आँखों में ठूस दिये जाएंगे
वे जानते हैं तुम्हारा मनोविज्ञान
पुराने सपनों को भूल जाना
और नये सपनों के पीछे भागना
दौड़ते-दौड़ते थक जाओगे
और फिर खुद ही रूक जाओगे  | 

Friday, 6 February 2015

हिन्दू हो या हो मुसलमान
चुनाव के दिन सब पहलवान |
वे हमारी आँखों में बसे
आदिम स्वप्न चुरा लेते हैं
और फिर बोलियाँ लगाते हैं |
ये हमारे देश की जनता है
हर बार पछताती है लेकिन गलतियां दोहराती है
मगरमच्छ उनकी इस आदत से भलीभांति परिचित है
वह जानता है कि
जब भी उन्हें प्यास लगेगी
वे अपनी प्यास बुझाने के लिए
अपनी आँखों में सुनहरी मछलियां लेकर
किसी तालाब पर ही तो जाएंगे
हर तालाब में एक मगरमच्छ बैठा है
वे भागकर अब कहाँ जाएंगे  ?
कितना भी कुरूप हो उसका प्रेम
जिसे वह प्रेम कहती है
उसके उस प्रेम का सम्मान करो
वह आयेगी
और आकर तुमसे लिपट जायेगी ?

Thursday, 5 February 2015

जब भी उदास होता हूँ 
मैं अपने और पास होता हूँ |

2
बच्चे थे बड़े हो गये 
अपने पाँव पर खड़े हो गये 
चलो अब उड़ चलें |
3
यादें बाँझ होती हैं 
बहुत परेशान करती हैं 
जब जिंदगी की साँझ होती है |

4
साथी वो 
जो साथ साथ चलता है 
मांझी वो 
जिसके साथ नाव चलती है |
5
मैखाने में जो पी थी सुबह उतर गयी 
तौबा है उस शराब से 
जो मंदिर और मस्जिद में पिलाई जाती है |
घोड़ा घास खाता है
यह तो मांस खाता है
यह घोड़ा नहीं हो सकता
यह तो चाबुक को भी डराता है |

Wednesday, 4 February 2015

दुश्मन दोस्त बनकर जिंदगी में आते हैं 
फूलों की मार से लहूलुहान कर जाते हैं


कुछ तो वजह होगी 
कोई किसी का इंतज़ार योहीं नहीं करता |

मैं प्रेम में था
टूटने के बाद मालूम पड़ा
बरसों बरस से जहाँ था वहीँ हूँ खड़ा |

नज़र से ओझल हुए 
वो किसी और के हुए


घर दीवारों से बनता है 
और मैं 
दीवारों से डरता हूँ 
चेहरे पर दाढ़ी उगाकर 
न जाने किस का इन्तिज़ार करता हूँ |

हर-बार टूटता है 
फिर भी वह सपना देखता है 
बार-बार उसे समझाया है कि
तू खिलौनों से क्यों नहीं खेलता है 
टूटता तो दूसरा खरीद लेता 
सपनों के टूटने से
आदमी के टूटने का डर बना रहता है |
साथी वो 
जो साथ साथ चलता है 
मांझी वो 
जिसके साथ नाव चलती है |



जब भी उदास होता हूँ 
मैं अपने और पास होता हूँ |


भक्त अंधा होता है 
सूरदास होने का ढोंग करता है 
वे नहीं जानते कि 
सूरदास तो सदियों में कोई एक पैदा होता है |


जिंदगी खूबसूरत है 
मौत अगर आने में देर कर दे
तो जिंदगी बदसूरत है |


वे उसे आकाश नहीं देंगे 
जमीन के टुकड़े को 
बेटों में ख़ुशी-ख़ुशी बाँट देंगे 
बेटियां जमीन के टुकड़े में 
अपने हिस्से की मांग नहीं करती 
बेटियां आकाश में उड़ने को हैं तरसती |
एक सांप नाथ 
एक नाग नाथ 
तुम्हारी मजबूरी है 
तुम्हें इन्ही में से एक को चुनना हैं 
उन्हें मालूम है कि
चुने जाने के बाद किसे डसना है |
रूठे अपने 
टूटे सपने 
अपनों को 
मनाने की जुगत करूँ
या सपनों को 
देखने की हिम्मत फिर करूँ ????
अपने आप से 
प्रश्न करने की बारी है 
प्रश्न तलवार दुधारी है 
बूमरैंग की तरह लौटकर आता है 
और प्रश्नकर्ता के सीने में धस जाता है 
प्रश्न करो
अपने आप से भी प्रश्न करो |