Friday, 26 June 2015

हर दर्द की
एक मियाद होती है
उस मियाद के बाद
हर दर्द
कूड़े के ढेर पर
माहवारी के खून से लिपटे
कपड़े की तरह घिनौना हो जाता है  |   
आपातकाल १९७५  के दौरान लिखी गयी 
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रानी ने 
फरमान जारी कर दिया कि 
उसकी सल्तनत की रियाया 
अब बोलेगी नहीं 
किसी भी बात पर अपना मुहं खोलेगी नहीं  । 

उसने कहा और 
फरमान लागू हो गया 
कानून की शक्ल में 
पेड़ जड़ों की गहराई नाप रहा है |   

रानी का विश्वास है कि 
मुल्क के लोग
लाठी और गोली की भाषा समझते हैं 
उसका हर कानून 
लाठी है या गोली है 
रानी के शब्दों में--
जनता निगोड़ी है बहुत बोलती है  |   

Friday, 5 June 2015

यकीन की कश्ती 
न जाने कब डूब गयी 
हम बेवजह पतवार खेते रहे |

2)

सपनो में हम
प्यार भी करते हैं
बलात्कार भी करते हैं
सपनों का खुलासा मत करना
वरना तुम्हें उस अपराध की सजा दे दी जायेगी
जो वास्तव में तुमनें किया ही नहीं  |
खामोश मुहब्बत का कोई अर्थ नहीं होता
सपनें में बिरयानी खाने से पेट नहीं भरता 

Thursday, 4 June 2015

पुराने दोस्तों से मिला
सभी ने पंख नोच डाले हैं
ठिठके खड़े हैं स्वप्न
उनकी आँखों में
प्रवेश करते हिचकिचाते हैं

हारे हुए लोग
अपनी सफलता की कहानी सुनाते हैं |