Avdhesh Nigam आपकी राय से
हमारी राय मेल नहीं खाती
बस इतनी सी बात है
बोलने का तो सबको हक़ है,
आप अगर नहीं चाहते कि कोई आपको बोलने से रोके तो दूसरों को बोलने से रोकने की कोशिश क्यों ?
मेरे भाई
तुम भी बोलो
हम भी बोले
मेरे बोलने पर यह बेरुखी क्यों ?
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Mohit Khan लेकिन जब बोलने की बात चले तो असहमति को देशद्रोह का नाम देने की क्या तुक है।
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Avdhesh Nigam जब बोलने की सबको छूट है तो गधे भी बोलेंगे घोड़े भी बोलेंगे
जब बोलने की सबको छूट है तो किसने क्या कहा का कोई अर्थ नहीं रह जाता है |
यह गधे और घोड़े जब देश के प्रधानमंत्री को कुछ भी कहने से नहीं चूकते तो हम तो आम लोग हैं |
अभिव्यक्ति की आज़ादी से तो अब तक तो हो जानी चाहिए हमारी अच्छी जान-पहचान |
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Mohit Khan क्या देश में पहली बार कोई प्रधानमंत्री बना है क्या? इससे पहले के प्रधानमंत्रियों के बारे में गेरुआ गैंग क्या क्या नहीं फैला चुका है
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Avdhesh Nigam भाई मेरी नज़र में तो न कल सही हो रहा था न आज सही हो रहा है | इस देश में सब कुछ पारम्परिक तरीके से ही होता आया है लोग परम्परा निभाए जाने के हिमायती है कोई बदलना नहीं चाहता है |अभिव्यक्ति की आज़ादी का यही तो अर्थ है बोलेंगे सब कोई सुनेगा नहीं |
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