1)
कैरम के खेल में भी किसी के लिए एक ही पॉकेट में सभी गोटियों को डाल पाना संभव नहीं हो पाता है |
2)
गिरगिट
है सबसे फिट
गिड़गिड़ाकर मीडिया से बोला
मेरी गलतियां भूलकर
एकबार फिर चलो हमारे संग
देखिये कैसे बदलता है गिरगिट अपना रंग
3)
भरी सभा में
द्रौपदी के चीरहरण के समय
वचनबद्ध भीष्म पितामह
सिर झुकाकर बैठे रहे |
सिंहासन से बंधे थे
लोगों की नजरों से बचाकर
द्रौपदी के नंगे जिस्म को
देखने की कोशिश करते रहे |
4)
खुद को सेक्युलर साबित करने की होड़ लगी है | इस दौड़ में अव्वल आने के चक्कर में कैसी-कैसी बेहूदा हरकते करते हैं यह राजनेता और भोंडे भोंडे तर्क देते हैं ये बुद्दिजीवी | मित्रों,क्या सच को साबित करने की जरूरत होती है ?
5)
भ्रष्ट्राचार मिटाने को बनी एक कमेटी
भ्रष्ट्राचार फ़ैल गया इसमें ही
अब इसका उन्मूलन करने को
बनेगी नयी कमेटी
जब तक अपने आप को
भ्रष्ट मानने के लिए हम नहीं तैयार
आप की सब कोशिशें हैं बेकार
भ्रष्ट्राचार न मिटा है,न मिटेगा
यह सिलसिला अनवरत योहीं चलेगा |
6)
क्या आपने ध्यान दिया है कि चुनाव जैसे जैसे आगे बढ रहा है ,साम्प्रदायिक होने के आरोप और खुद को सेक्युलर साबित करने की हड़बड़ाहट अब नहीं दिखाई दे रही है | जनता को इस सेक्युलर शब्द से ही साम्प्रदायिकता की बू आने लगी है, यह जनता है और जनता सब जानती है अब बहकावे में नहीं आने वाली |
7)
दोस्तों, अपने अपने पक्ष को लेकर बहुत हो चुका आरोप-प्रत्यारोप ,चुनावी वातावरण में अब जहर धीरे-धीरे दिमाग में भी घुलने लगा है और इस स्तिथि को मैं अपने लिए उचित नहीं मानता अतः अंतिम चरण के चुनाव होने तक किसी भी राजनीतिक विषय पर नो लाइक,नो कमेंट एंड नो पोस्ट