Thursday, 3 April 2014

जाति या धर्म के नाम पर जो भी वोटों को लुभाने या बरगलाने की बात करता है,वह साम्प्रदायिक है | इस आधार पर इस देश में कोई भी सेक्युलर पार्टी नहीं है | क्या सेक्युलर(धर्म-निरपेक्ष )शब्द से ही घोर साम्प्रदायिकता की बू नहीं आती है ?

हर राजनीतिक पार्टी के पास बुद्धिजीवियों का एक हुजूम हैं और यह बुद्धिजीवी सेक्युलर शब्द की व्याख्या अपनी अपनी  पसंद की पार्टी के पक्ष में करते हुए गर्व से फूले नहीं समाते हैं, इस महान देश के बुद्धिजीवियों आखिर सेक्युलर शब्द के साथ बलात्कार में आपका सहयोग इन राजनीतिज्ञों को कब तक मिलता रहेगा?      

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