Thursday, 20 August 2015

कुछ प्रश्नों के जवाब नहीं मिले | 
मिट न पाये शिकवे और गिले ||


गजल से लिपट जाए 
तो कविता संवर सकती है 
कम शब्दों में 
बात कहने का सलीका नहीं सीखा 
तो कविता मर भी सकती है |


हो गया है
जागने का वक़्त
नींद है भरपूर आँखों में
सोने के वक़्त
क्यों नींद उड़ जाती है आँखों से |
हम खुद को 
जब भी देखते हैं 
आईने में ही देखते हैं 
कभी खुद को 
अपने सामने बैठाकर
आँखों में आँखें डालकर भी तो देखो |
मैं "देशभक्ति" हूँ 
साल में दो बार तो निश्चित रूप से आती हूँ 
और कभी कभी जब पाकिस्तान 
हमारे सैनिकों के सिर काटकर ले जाता हैं 
तब मुझे मजबूरी में आना पड़ता है |
नागपंचमी
नागों से दोस्ती करो
मुफ्त में ज़हर मिलने की सुविधा उपलब्ध |



वे त्रस्त हैं फिर भी 
शव की आराधना में व्यस्त हैं |
यह भी एक पर्व है 
बहनें गुड़िया बनाती थी 
भाइयों के हाथ में छड़ी थमाती थी 
नजदीक के चौराहे पर 
गुड़िया को फेंकती थी 
और भाइयों के हाथ की छड़ी
गुड़िया को पीटती थी
गुड़िया को पीटने का
जो सबक बहनें सिखाती हैं
भाई लोग उसे
अपना धर्म मानकर जिंदगी भर निभाते हैं |
आसमान में आखिर कब तक उड़ोगे ?
प्यार करने के लिए
तुम्हें उतरना ही होगा
घर जमीन पर ही बनाना होगा
अपने अंतिम संस्कार के लिए
आखिर तुम्हें धरती पर ही आना होगा |

Wednesday, 5 August 2015

कोई अपना नहीं होता
कोई पराया नहीं होता
नजराने बदल देते हैं नजरिया
नजरानों का कोई घराना नहीं होता |  -मैगी प्रकरण।
चीटी को हराया
शेर से हाथ मिलाया
आपकी चाकरी में
खड़ा है अगर शेर
तो जीने के लिए
रोज-रोज समझौते करने की
मजबूरी हो जाती है ढेर
ताक़तवर को
नींच कहने की सामर्थ्य अब उनमे नहीं रही  | 

Saturday, 1 August 2015

राजनीति के शिखर पर बैठे राजनेता 
और पिछलग्गू बुद्धिजीवियों का हुजूम 
ये हमेशा रहे हैं, हमेशा रहेंगे 
ये कभी नहीं होंगे मरहूम |
भीषण ठण्ड में 
चिलचिलाती धूप के दर्शन कहाँ होते हैं 
सूरज महाशय इन दिनों मुहं ढक के सोते हैं |
अँधेरे से 
सूरज को डर लगता है
किया सलाम 
और कहा चलो कलाम 
ले गया सूरज 
उनको अपने घर
रोशनी के लिए |


2)
कलाम से कलाम का धर्म किसी ने नहीं पूछा
उनसे जो मिला जब मिला झुककर सलाम ठोका
आतंकवादी कौन ?
विदेशी ताक़तों के सहयोग से 
देश में कत्लेआम की साजिश को 
जो देता हैं अंजाम और कौन ?
याकूब मेनन को आतंकवादी कहने में क्यों हिचकते हो मेरे भाई |


2)
शर्म आती है जब अपराधियों को भी हिन्दू और मुसलमान की नज़र से देखा जाता है | इस दूषित राष्ट्रीय चरित्र के निर्माण में जिनका योगदान है आइये उन्हें चिन्हित करें |

3)
राजनीति ने 
उनके चेहरों को भद्दा बना दिया 
इसीलिए तो उन्होंने 
अपने आस-पास से आइनों को हटा दिया |
असहमति,
धूप चिलचिलाती है 
किसे भाती है ?????