Wednesday, 30 December 2015

तेरे बस में था
हे ईश्वर तू पेट न बनाता
भरे पेट वालों का मजहब
तब इतना उत्पात न मचाता |

Tuesday, 29 December 2015

हवा दे दी , पानी दे दिया
धरती दे दी ,आकाश दे दिया
ज़िंदा रहने के लिए
जो कुछ जरूरी था उसने दे दिया
इसके एवज में
तुमने उसे मंदिर/ मस्जिद में क़ैद कर दिया |

Friday, 25 December 2015

फिर नया साल

नए साल में कभी
क्या कुछ भी नया हुआ ?
वही मंदिर-मस्जिद की लड़ाई
किस अधिकारी
और किस मंत्री ने
कितनी रिश्वत खाई  ?
भूखे सो जानेवालों की संख्या में
कितना इज़ाफ़ा हुआ यह बात किसी ने कभी नहीं बताई
हरबार बलात्कार के बाद मोमबत्तियां खूब जलाईं |
परम्परा को तोड़ने की नादानी
हम कभी नहीं करते हैं
बीते साल की बिदाई
और नए साल के स्वागत की तैयारी
जोर शोर से करते हैं
आइये जन गन मन अधिनायक गाते हैं
शुभकामनायें देने की औपचारिकता एकबार फिर निभाते हैं | 

Wednesday, 16 December 2015

औरत से कोई नहीं पूछता उसका धर्म
भोग लेने के पहले
औरत से नहीं पूछी जाती है उसकी जाति 

Sunday, 13 December 2015

ज़िंदा नजर आओगे
तो बेमौत मारे जाओगे

ज़हर को
अमृत समझकर पीना है तो पियो
मुस्कराने का कोई सबब ही नहीं बचा
लाश की शक्ल में जीना है तो जियो

बड़ी तेज रफ़्तार है जिंदगी की
बरसों का सफर मिनटों में तय करो  |

Saturday, 12 December 2015

उदय प्रकाश ने कुलबुर्गी को 
कब्र से खोदकर निकाला 
अशोक बाजपेयी ने कुलबुर्गी को 
कब्र में फिर डाला और अखलाख का जिन्न निकाला
अखलाख का जिन्न उदय प्रकाश को निगल गया 
चारो ओर फैला अशोक बाजपेयी का उजाला |
तेईस बरस 
बनारस में गुज़ारे हैं 
जाड़ा,गर्मी ,बरसात 
जब भी गया मणिकर्णिका घाट
एक रोशनी बहार से भीतर 
मेरे अन्दर गयी है पैठ
जलती हुई चिताओं की रोशनी
मणिकर्णिका घाट पर
अँधेरा नहीं होने देती |
वे सवाल करते भी तो क्या करते 
तुम्हारे हर जवाब से उनकी अच्छी पहचान है |
कितना भी बताओ 
कुछ रह ही जाता है बताने से 
हर दिन कुछ नया 
जुड़ जाता है हमारे फ़साने में |
अभी-अभी 
या फिर नहीं कभी 
खड़ी रह जाती है 
जिंदगी ठगी-ठगी 
पाँव के नीचे 
दूब सी दबी-दबी |
हिन्दुस्तान की कसम, 
चारागाह उनके पुरखों का था , चर लिया तो क्या गुनाह किया ?
सलमान खान को अगर सजा हो जाती,
असहिष्णु होने का इलज़ाम फिर लगाया जाता 
सेक्युलर लोगों द्वारा ;
देर रात सर्वोच्च न्यायालय का दरवाज़ा एक बार फिर खटखटाया जाता |
चलो गरीब के हक़ के लिए लड़ते हैं 
शुरुआत किसान से करते हैं 
सैकड़ों एकड़ जमीन अपने नाम करते हैं |
बना रहेगा
हर रिश्ता पवित्र
छिड़कते रहिये इत्र
रिश्ता रिसने लगे
इसके पहले आपको
इतना तो करना ही पड़ेगा |

Friday, 4 December 2015

खींच ली है उन्होंने पैरों के नीचे से जमीन  |
अब उनकी किसी बात पर होता नहीं यकीन ||
जन्नत है
दोजख  से कुछ बेहतर
सच मानों
वहाँ इंसान नहीं मुर्दे रहते हैं
उनके पास स्वर्ग है
नरक से कुछ बेहतर
वर्जित है इंसानों का प्रवेश
सच जानो स्वर्ग है मुर्दों का देश  |