तेईस बरस
बनारस में गुज़ारे हैं
जाड़ा,गर्मी ,बरसात
जब भी गया मणिकर्णिका घाट
एक रोशनी बहार से भीतर
मेरे अन्दर गयी है पैठ
जलती हुई चिताओं की रोशनी
मणिकर्णिका घाट पर
अँधेरा नहीं होने देती |
बनारस में गुज़ारे हैं
जाड़ा,गर्मी ,बरसात
जब भी गया मणिकर्णिका घाट
एक रोशनी बहार से भीतर
मेरे अन्दर गयी है पैठ
जलती हुई चिताओं की रोशनी
मणिकर्णिका घाट पर
अँधेरा नहीं होने देती |
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