Thursday, 28 January 2016

हे स्त्री  धर्म और उससे जुड़े पाखण्ड की जड़े समाज में तुमने ही तो रोपी है,क्यों गिड़गिड़ाती हो,एक कुरूप चेहरे को तेल लगाकर और कुरूप क्यों करना चाहती हो  शनिदेव की प्रतिष्ठा तुम ने ही तो बढ़ाई है | तुम्हें केवल इतना करना है अपने पतियों से कहो कि शनिदेव के मंदिर की ओर रुख नहीं करना है | निश्चित जानिये शनिदेव छटाक भर तेल के लिए तरस जाएंगे

Monday, 25 January 2016

वह सीता क्यों बने
शुचिता की परीक्षा देने का
दर्द बार-बार क्यों सहे ?  

Monday, 18 January 2016

बूढ़े ने
बूढ़े को बूढ़ा कहा
बूढ़ा जवान हो गया

बेईमान ने
बेईमान को बेईमान कहा
बेईमान ईमानदार हो गया

मुर्दे ने
मुर्दे को मुर्दा कहा
मुर्दा जानदार हो गया

चोर ने
चोर को चोर कहा
चोर थानेदार हो गया

लड़की ने
लड़के से प्रेम कहा
प्रेम दागदार हो गया

लड़के ने
लड़की से प्रेम कहा
तो लड़का जवान हो गया

उसका सिर
सजदे में नहीं झुका
तो फतवा सरेआम हो गया

ईश्वर को
बचाने की चाह में
आदमी हैवान हो गया

जो भूला
मंदिर/मस्जिद का रास्ता
वह इंसान हो गया

जिसे देखा नहीं किसी ने
वह भगवान हो गया  |



देश के प्रधानमन्त्री से भ्रष्ट्राचार दूर करने की गुहार लगाते लोग , भ्रष्ट्राचार को दूर करने के उपाय बताते लोगों से मुझे कुछ कहना है - हम सब के अंदर एक भ्रष्ट्राचारी बैठा है , यह सवाल तो हमें खुद से करना चाहिए ,हमारे भीतर जो भ्रष्ट्राचारी बैठा है उसकी ह्त्या तो हमें खुद ही करनी होगी | अफ़सोस हमारे भीतर बैठा भ्रष्ट्राचारी हमें नहीं दिखता |

ह्त्या के लिए कानून है तो क्या हत्याएं नहीं होती | बलात्कार के लिए क़ानून है तो क्या बलात्कार नहीं होते | क़ानून बनाने से कुछ नहीं होगा , हम क्यों मानना नहीं चाहते कि हम सब के भीतर एक भ्रष्ट्राचारी बैठा हुआ है ?
जीवन का सत्य
न मै जानता हूँ
न तुम जानते हो
फिर भी हम
बड़ी-बड़ी ढींग हांकते हैं |
ढींग हांकने की
यह परंपरा बड़ी पुरानी है
इंसान पर धर्मग्रंथों का बोझ बड़ा भारी है |

Saturday, 16 January 2016

अपना तो खेल खतम
अब बच्चे खेल रहे हैं 
और हम 
दर्शक दीर्घा में बैठे देख रहे हैं |
ईश्वर को बचाने की हमारी बेहूदी हरकतों से घबराकर निश्चित ही एक दिन ईश्वर आत्महत्या कर लेगा |

Tuesday, 12 January 2016

सूप में धूप 
हो गयी पुरानी बात 
अब लोग धूप को 
छलनी से बटोरते हैं 
और फिर हमें परोसते हैं |
मौत का दिन तो मुकर्रर है 
हमें पता नहीं इसलिए डर है |
मौत का दिन 
पता करके क्या करोगे 
पता लग गया जो 
तो ठीक से जी भी न सकोगे
मरना नहीं है
यह सोचकर जियो
और जो भी मिले राह में उसका खून पियो |
आज अगर कृष्ण आएगा 
धृतराष्ट्र को राष्ट्रपिता की उपाधि देकर 
दुर्योधन को भारत रत्न बतलायेगा 
हमारे धर्म की किताबों में लिखा है
कलियुग में तो कृष्ण को भी भ्रष्ट होना है |
हवा दे दी , पानी दे दिया
धरती दे दी ,आकाश दे दिया 
ज़िंदा रहने के लिए
जो कुछ जरूरी था उसने दे दिया
इसके एवज में
हमने उसे मंदिर/ मस्जिद में क़ैद कर दिया |
एक देश है भारत,यहां पे हिन्दू रहते,मुसलमान रहते हैं ,सिक्ख और ईसाई रहते हैं |कन्याकुमारी से कश्मीर तक टहल आइये खुद को भारतीय कहने वाला शायद ही कोई मिले ?
एक देश है इण्डिया,यहां पर भी हिन्दू रहते ,मुसलमान रहते हैं ,सिक्ख और ईसाई रहते हैं | उत्तर से दक्षिण तक घूम आइये खुद को इंडियन कहने वाला शायद ही कोई मिले ?
एक देश है हिन्दुस्तान ,यहां पर तमाम जातियों और तमाम धर्मो के लोग सदियों से एक साथ रहते हैं |पूरब से पश्चिम तक,उत्तर से दक्षिण तक चारों दिशाओं में खुद को हिन्दुस्तानी कहनेवाला एक भी नहीं मिलेगा |
विचित्र है लेकिन सत्य है |
जो रंग ठहर जाते हैं 
आँखों को चुभने लगते हैं
पिता एक अहसास है और मैं 
अपने बच्चों को 
पिता का अहसास कराना चाहता हूँ 
मैं पिता की कुर्सी पर बैठना चाहता हूँ
अलविदा पिता
तुम्हें अलविदा कहना ही होगा परमपूज्य पिता |
मालदा 
फिर पूर्णिया 
सहिष्णुता की मिसाल 
कमाल है जी कमाल 
अब किसी को नहीं है कोई मलाल |

2)
हे ईश्वर
तेरे बस में था
तू पेट न बनाता
भरे पेट वालों का मजहब
तब इतना उत्पात न मचाता |
वह ओढ़ता है
विनम्रता का लबादा
वह जानता है,
पारदर्शी नहीं होती विनम्रता की चादर
उस पार बैठे हुए जानवर को कोई देख नहीं पाता |

Friday, 1 January 2016

प्यार में
न हो तकरार
तो कैसा प्यार
जरूरी है गोश्त
प्यार में दोस्त  |