हे स्त्री धर्म और उससे जुड़े पाखण्ड की जड़े समाज में तुमने ही तो रोपी है,क्यों गिड़गिड़ाती हो,एक कुरूप चेहरे को तेल लगाकर और कुरूप क्यों करना चाहती हो शनिदेव की प्रतिष्ठा तुम ने ही तो बढ़ाई है | तुम्हें केवल इतना करना है अपने पतियों से कहो कि शनिदेव के मंदिर की ओर रुख नहीं करना है | निश्चित जानिये शनिदेव छटाक भर तेल के लिए तरस जाएंगे
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