Tuesday, 12 January 2016

जो रंग ठहर जाते हैं 
आँखों को चुभने लगते हैं
पिता एक अहसास है और मैं 
अपने बच्चों को 
पिता का अहसास कराना चाहता हूँ 
मैं पिता की कुर्सी पर बैठना चाहता हूँ
अलविदा पिता
तुम्हें अलविदा कहना ही होगा परमपूज्य पिता |

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