रंजिशों का जिक्र
हम नहीं करते
याद रखते हैं फूलों को
काँटों का जिक्र हम नहीं करते |
Saturday, 29 October 2016
आदमी अगर भूखा है
तो खाना खायेगा
भोग नहीं लगायेगा |
जिनके पेट भरे हैं
भोग लगाने की होड़ में
मंदिर में हाथ फैलाये खड़े हैं |
Friday, 28 October 2016
अब तक न संवरी
अब क्या खाक संवरेगी
कब तक सतायेगी
ऐ जिंदगी तू मुझसे रूठ क्यों नहीं जाती |
Wednesday, 26 October 2016
सच को अँधेरे में रहने की आदत है / सच को रोशनी में लाना बगावत है |
सच को
अँधेरे में रहने की आदत है
सच को
रोशनी में लाना बगावत है
आदमी अगर भूखा है
तो खाना खायेगा
भोग नहीं लगायेगा |
Friday, 21 October 2016
अब तो मुर्दे सवाल करते हैं
और हम खुद को ज़िंदा समझते हैं |
जवाबों के तो अम्बार लगे हैं
सवाल ही कहीं कब्र में सोये पड़े हैं |
Wednesday, 12 October 2016
जिस दिन सीता धरती में समाई थी रामराज्य भी धरती में समा गया था | न सीता लौटकर आएँगी न रामराज्य लौटेगा | रावण को जलाने की परंपरा निभाते रहे और राम के गुन गाते रहे | रामराज्य खयाली पुलाव है बैगैर आग का अलाव है सीता के जिस्म का घाव है |
आतंकवाद से दुनिया में हर दिन सवा मौतें होती हैं। भूख से हर दिन तेईस हज़ार मौतें होती हैं। दुनिया के राजनेता जब आतंकवाद को मनुष्यता का सबसे बड़ा दुश्मन बताते हैं , वे खुद मनुष्यता से सबसे बड़ी दुश्मनी निभा रहे होते हैं।
Avdhesh Nigamआतंकवाद के पक्ष में एक नई दृष्टि | आतंकवादियों को समस्त सुविधाएं उपलब्ध करानी चाहिए ताकि वे आतंकवाद से होने वाली सवा मौतों को भूख से मरने वाली २३००० मौतों के बराबर पहुंचा सके और शायद तब आपके अनुसार आतंकवाद का विरोध करने को उचित ठहराया जा सकता है | आपके अनुसार फिलहाल आतंकवाद को बढ़ावा देने का वक्त है और यह काम पाकिस्तान बखूबी कर रहा है, पूरे विश्व को पाकिस्तान के पक्ष में खड़ा हो जाना चाहिए |
Monday, 3 October 2016
जब मिलते हैं हाल चाल पूछ लेते हैं मरे हुए सम्बन्धों की बस इतनी कहानी है |
वजह तो
मेरे पास भी थी
तुम्हें भूल जाने की
लेकिन यह हो न सका
सजा जो भुगतनी थी
तुमसे दिल लगाने की |
Sunday, 2 October 2016
एक तरफ जय श्री राम तो दूसरी तरफ लाल सलाम ,
कठमुल्लों के देश में होई न कौनों काम |