Friday, 26 April 2013

स्त्री के विरुद्ध लिखो तो स्त्री को बचाने आ जाते हैं सब के सब | पुरुष के विरुद्ध लिखो तो सब के सब आ जाते हैं पुरुष को बचाने के लिए | स्त्री के पक्ष में लिखो तो स्त्रियों का समर्थन कम पुरुषों का समर्थन १०० प्रतिशत | यह जो स्त्रियों के ऊपर अत्याचार हो रहा है या होता है पुरुषों द्वारा वे पुरुष आखिर सौरमंडल के किस ग्रह से आते है ?
 
तृप्त नहीं है कोई
=============
क्या सिखाया था याद नहीं ?
मैं सीखता हूँ सब कुछ
इश्क भी
भूल जाने के लिये |
वक़्त ने जो सिखाया
उसे याद रखने के लिए
अभिशप्त हूँ
कहीं नहीं है ?
कोई नहीं है ?
जो कह सके=
मैं तृप्त हूँ  |
"पुरुष जब भी मौन होता है छिपी होती है उसके पीछे गहरी साजिश स्त्री के विरुद्ध | न जाने स्त्री कब समझेगी पुरुष के इस मौन को ? मुझे लगता है स्त्री का मौन स्वीकारता हैं और पुरुष का मौन नकारता है |"
मित्रगण अपना मत प्रगट करें |
जो केवल अपने बारे में सोचते हैं वही तो हैं मस्त !
दूसरों के बारे में सोचते थे वे सभी हो गए हैं पस्त !!

 

Monday, 22 April 2013

"कन्यादान" करके बेटी को वस्तु तो आप बना ही देते हैं और फिर रोते हैं | क्यों भूल जाते है कि दान वस्तु का किया जाता है व्यक्ति का नहीं ?कन्यादान महादान कहकर आपको बरगलाया गया आप खुश हुए कि इस महादान का कुछ पुण्य तो आपको मिलेगा ही |

कन्या को पराया धन कहा जाता है क्यों ? कन्या को माता पिता के क्रियाकर्म करने का अधिकार नहीं दिया गया ,आखिर क्यों ? विधवा स्त्री को किसी तथाकथित शुभ कार्य में शामिल होने की मनाही क्यों ? बेटियों तुम सवाल क्यों नहीं करती ? सवाल करो जवाब तुम्हें खुद में तलाशना है | बहुत बेदर्दी से डाली गयी हैं बेड़ियाँ तुम्हारे पैरों में ,बेड़ियों को उतार फेको और याद रक्खो कि तुम जननी हो |
मैं कहता हूँ कि अब हमें बलात्कार के लिए तलाशना होगा कोई नया शब्द | इस शब्द बलात्कार से अब दुर्गन्ध आने लगी है और इसके लिये हुक्मरानों ने बड़ी सख्त सजाओं का प्रावधान भी कर दिया है |देश के बुद्धिजीवियों और हुक्मरानों से मेरा विनम्र अनुरोध है कि बलात्कार के लिए कोई नया शब्द गढ़ें इससे कई फायदे होंगे | बलात्कार के स्थानापन्न शब्द की खोज होते ही बलात्कार के लिए बने सभी कानूनों की वैधता समाप्त हो जायेगी और इस बाबत नया कानून बनाने में जो वक़्त लगेगा उस वक़्त में बलात्कारियों को बलात्कार करने की सुविधा उपलब्ध हो जायेगी |     

Sunday, 21 April 2013

कब आएगी हमको शर्म |
हम क्यों हैं इतने बेशर्म ||
बलात्कार उसके साथ क्यों ?
===================
भूखा भेड़िया
सदियों तक नहीं होगा तृप्त
इसका मतलब
बेटियाँ बलात्कार के लिए हैं अभिशप्त
इसबार यह सब उसके साथ हुआ
जो नहीं जानती
आदमी और औरत का फर्क
वह नहीं जानती
अस्मत के लुट जाने का अर्थ
वह जानती है सिर्फ दर्द
अपने पिता से
वह टांगों के बीच
दर्द होने की बात कहती है
और चीख चीख कर रोती है |
पिता बच्ची से
आँख नहीं मिला पाता है
आईने में देखता है जब खुद को
सामने एक मर्द खड़ा पाता है |
सोचो क्या होगा
जब एक बेटी की माँ
बेटी के पिता को
शक की निगाह से देखेगी
और पिता से
दूर रहने की हिदायत बेटी को देगी |

Saturday, 20 April 2013

क्यों बोलते हैं हम झूठ
कौन किसको याद करता है ?
रेत पर बने निशान मिट जाते हैं
जब आती हैं हाथ में छड़ी की मूठ |
गाय माता/ माता
============
गाय जब तक दूध दे रही
गाय को माता कहना होगा
महाप्रयाण के वक्त तुम्हें
गऊ दान भी करना होगा
गाय देना दूध बंद कर दे
कसाई के हाथों देना होगा
गाय माता या हो माता
कौन माता कैसी माता
सभी माताओं को नमन
मैं गलत तो नहीं हूँ श्रीमन |                  इतिश्री गऊ माता पुराण
गाय जब तक दूध दे रही
गाय को माता कहना होगा
महाप्रयाण के वक्त तुम्हें
गऊ दान भी करना होगा
गाय दूध देना बंद कर दे
कसाई के हाथों देना होगा
गाय माता या हो माता
कौन माता कैसी माता
सभी माताओं को नमन
मैं गलत तो नहीं हूँ श्रीमन |

Friday, 19 April 2013

परिंदा
======
परिंदा
आदमी से बेहतर है
वह कभी मंदिर पर
और कभी मस्जिद पर
(बैगैर किसी पूर्वाग्रह के)
मल त्याग करता है |
परिंदे की यह शरारत
आजतक किसी
दंगे का कारण क्यों नहीं बनी ?
क्योकि
परिंदे का कोई धर्म नहीं होता |

Tuesday, 16 April 2013

गलतफहमी
हमको भी है
उनको भी है
कोई गलतफहमी
जब सबको हो जाती है
तब गलतफहमी
नहीं कही जाती है |
परिंदा
आदमी से बेहतर है
वह कभी मंदिर पर
और कभी मस्जिद पर
(बैगैर किसी पूर्वाग्रह के)
मल त्याग करता है |
परिंदे की यह शरारत
आजतक किसी
दंगे का कारण नहीं बनी |

Monday, 15 April 2013

मैं
====
एक साथ
ढेरों सवाल किये
उत्तर नहीं मिले
मैं सवालों पर ही
प्रश्न चिन्ह लगाने में
आज भी हूँ व्यस्त ?
तुम
=====
तुमने सवाल किये
कुछ के जवाब मिले
कुछ के नहीं
मैंने अपने सपनें मे देखा
तुम आराम से
मलमली बिस्तर पर सोते हुए मिले
वे
=====
वे खुश हैं
वे बहुत खुश हैं
उनके ज़ेहन में
सवाल नहीं उठते |


वे उदास हैं
वे बेहद उदास हैं
उनके सवालों को
जवाब नहीं मिलते | 

Sunday, 14 April 2013

आम के दाम जब भी गिरते हैं  !
घर में स्वादिष्ट अचार बनते हैं !!
मन जब मर जाता है
नाँव से ध्यान हट जाता है !
फिर डूबें या पार जाएँ
सब अर्थहीन हो जाता है  !
मत बाटो प्रथ्वी को
==============
पूरी प्रथ्वी खेमों में बटी है
इसीलिए सहमी सहमी सी है प्रथ्वी
प्रथ्वी को बाँट दिया
देश की सीमाओं में घेरकर
फिर देश को बाँट दिया
चार दिशाओं के नामपर  |

सीमाएं सहमी सहमी सी हैं
दिशायें सहमी सहमी सी हैं
देश बँट गए खेमों में
और यह सारा उत्पात
मचा हुआ है जो इस प्रथ्वी पर
इन्ही खेमों की देन है
आप गौर से देखिये
तो हर खेमा एक ओसामा बिन लादेन है |
पत्नी को दोस्त बनाने में
जिंदगी हो गयी खर्च
दोस्त तो मिला नहीं
पत्नी भी कहीं खो गयी
अब दोस्त नहीं खोजता हूँ
पत्नी को खोजने में हूँ व्यस्त |
जो अब हमारे पास है वह खोने न पाए !
माँ भारती अब फिर कभी रोने न पाए !!


यदि चुकाना चाहते हो कर्ज जो तुम पर है !
बस यह बात तुम सभी को याद रखना है !!
पीड़ा
======
पीड़ा पर विराम ?
समझ में नहीं आया ?
पीड़ा कभी थकती नहीं
थककर बैठती नहीं
पीड़ा इत्र सी फैलती है |
महकाती है
आपके आस पास सब कुछ |

Saturday, 13 April 2013

सपने अब नहीं आते 
==========
अब सपने
मेरे पास नहीं आते
मैं जाता हूँ सपनों के पास
हाथ जोड़ता, गिड़गिडाता
दुतकारतें हैं सपने
पुचकारते थे कभी
नींद के साथ चले आते थे
चुपचाप सपने |
प्यार करो
================
बस भी करो मित्रों
अपने प्यार की कहानी लिखना

प्यार करने की जरूरत है
और हम अपना सारा वक़्त
प्यार के नगमें लिखने में
कर रहे है खर्च   |

बहुत लिखे गए प्यार के गीत
निभाई गयी रीति
अपने भीतर प्यार भरो
देखो ,तीसरा विश्व युद्ध दस्तक दे रहा है
प्यार करो ,प्यार करो
अपने भीतर प्यार भरो
अगर रोकना है एक और विश्व युद्ध
पीड़ा पर विराम ?
समझ में नहीं आया ?
पीड़ा कभी थकती नहीं
थककर बैठती नहीं
पीड़ा इत्र सी फैलती है |
अनुभव आपको डरपोक बनाता है
छूकर जानो आग को
पीओ और जानो प्यास को
हमने बताया और तुमने मान लिया
कैसे जानोगे प्यार को ?
एक दूसरे को भरमाया था
तभी एक दूसरे को पाया था
जिंदगी भर भरमाते रहे
एक दूसरे को
गाते रहे प्यार के गीत === एक दूसरे को भरमाने की नसीहत मत दीजिये ,सब पहले से ही बहुत समझदार हैं ,एक दूसरे को भरमाते हैं और सारे रिश्ते बखूबी निभाते है |
हम इतने हो गए है शातिर
कि सारी उम्र बनाए रखते हैं भरम
देखिये न कोई भी रिश्ता
रिसता हुआ नहीं दिखता |
अब पानी की बारी
कारपोरेट हाँथों में
पानी को सौपने की तैयारी
आप हवा खाईये और हवा पीजिये
श्वांस लेने के लिए कोई पूरक व्यवस्था करेगी सरकार |
पूरक व्यवस्था का मात्र आश्वासन है
द्रौपदी का चीर
खींच रहा दुशासन है |

Friday, 12 April 2013

हमने अपनी सुरक्षा के लिए एक ईश्वर को पैदा कर लिया है और सारी ताकत ईश्वर को सौंप दी और कहा कि तुम से ज्यादा शक्तिशाली कौन हो सकता है, तुम्हें ही लड़ना है मेरे लिए, मैं बस मंदिरों में घंटियाँ बजाता हूँ,मंदिरों में भजन कीर्तन करता हूँ तथा अपनी अपनी सामर्थ्य के अनुसार ईश्वर को घूस देकर हम निश्चिंत हो जाते हैं |
अगर ईश्वर को आप सर्वशक्तिमान मानते हैं तो आप भूलिए मत कि वह महाबुद्धिमान भी है, उसे आप बेवकूफ़ नहीं बना सकते। आप मंदिरों में घंटियाँ बजाएँ और वह आपके लिए लड़ता फ़िरे! तभी तो ईश्वर ने हमें हमारे हाल पर छोड़ दिया और हम सदियों तक गुलाम रहे।
इसलिए ईश्वर को भूल जाइये और याद रखिये कि आपको अपनी लड़ाई खुद लड़नी है |
बस भी करो मित्रों
अपने प्यार की कहानी लिखना


प्यार करने की जरूरत है
और हम अपना सारा वक़्त
प्यार के नगमें लिखने में
कर रहे है खर्च   |


बहुत लिखे गए प्यार के गीत
निभाई गयी रीति
अपने भीतर प्यार भरो
देखो ,तीसरा विश्व युद्ध दस्तक दे रहा है
प्यार करो ,प्यार करो
अगर रोकना है एक और विश्व युद्ध |

Thursday, 11 April 2013

हिन्दू ,हिन्दू की तरह न सोचे
मुसलमान , मुसलमान की तरह न सोचे
हमें चाहिए ऐसे लोग
जो इंसान की तरह सोचें |
====
नहीं जानता
मेरा यह सपना
सपना ही रहेगा
या होगा साकार
मेरे दिमाग में मेरे देश का जो चित्र है
क्या लेगा वह कोई आकार |
कैसे सोचते हो ?
================
हिन्दू , हिन्दू की तरह न सोचे
मुसलमान , मुसलमान की तरह न सोचे
हमें चाहिए ऐसे लोग
जो इंसान की तरह सोचें |
वे लोग
जो हिन्दुओं को बरगलाते हैं
हिन्दुओं की तरह सोचने के लिए
मुसलमानों को बाध्य करते हैं
मुसलमान की तरह सोचने के लिए
और देखते हैं अखंड भारत का सपना

हमें इंसानियत को बचाना है
दोगलापन छोड़कर
आईने के सामने आना है  | 
तुम्हें देखकर
जब आईना मुस्कराएगा
तब हमारा देश
एक बार फिर
विश्व गुरु कहलाएगा  |
नास्तिक या आस्तिक कहते ही ईश्वर की सत्ता को स्वीकार नहीं कर लेते हैं हम ? मुझे तो लगता है कि शब्दकोष सें इन दोनों शब्दों को निकाल देना चाहिए | एक ईश्वर की सत्ता को नकारता है और दूसरा ईश्वर की सत्ता को स्वीकारता है ,अंततः दोनों ही ईश्वर के होने या न होने की ही तो बात करते हैं |  
नवरात्रि का पहला दिन ,तमाम से ढकोसले शुरू ===
१) एक नवयुवक कुछ दिन पहले मिला उसे किसी से प्यार हो गया था परेशान था,मैंने कहा कि क्या दिक्कत है अपने प्यार का इज़हार कर दो तो उसने कहा कि नहीं अंकल अभी दिन ठीक नहीं चल रहे है सोचता हूँ की नवरात्रि के दिनों में अपने प्यार का इज़हार करूँ |
 

२) पिछले एक हफ्ते से मेरी पत्नी बच्चों को चिल्ला चिल्ला कर कह रही थी कि रोज चिकन और मटन खा लो फिर नौ दिन घर में कुछ नहीं बनेगा |
 

३) पति पत्नी नौ दिन का व्रत रखते हैं और इन दिनों उन्हें एक बिस्तर पर लेटने की मनाही होती है यानि कि कोई प्यार नहीं होगा |
 

४) कुछ लोग जो निर्जल व्रत रखतें हैं उनमें अहंकार अपने चरम पर होता हैं ,श्रीमती दुर्गा के वाहन शेर पर सवार होकर ऐसा लगता है कि विश्व विजय करके ही वापस आयेंगे |


कहने को तो अभी बहुत कुछ है लेकिन इतना यह साबित करने के लिए पर्याप्त है कि "हम किसी से कम नहीं "

Wednesday, 10 April 2013

दूध के धुले न हम हैं न तुम !
न जाने कौन से नशे में हैं हम !! 


न हम, हम रहे न तुम तुम , जानते हैं !
मुड़कर न जाने क्यों फिर देखते हैं हम !!


रोते हैं वे क्योकि हँस नहीं सकते !
रोते हैं वे यह सोचकर खुश हैं हम !!


प्यार आदमी को अहंकारी,है बना देता !
प्यार नेमत है कभी न सोचते है हम  !!
मेरी ग़ज़ल को मित्र मनिका मोहिनी ने सुधार कर उसमें वज़न पैदा कर दिया है मैं उस ग़ज़ल को उनके मैसेज के साथ पुनः पोस्ट कर रहा हूँ इसके लिए मैं उनका आभारी हूँ ,मनिका मोहनी जी आपके कमेंट मुझे ऐसे ही मिलते रहेगे यह मेरा विश्वास है ,धन्यवाद   
Avdhesh bhaai, jo aapne aaine wali gazal likhi hai, bura na maane to kahun ki uski lines me vazan sahi nahi baithh raha islie rhythm sahi nahi aa raha. Maine sirf vazan thheek karne ki koshish ki hai, bataaen ki kaisi lagi? Bura laga ho to kshama chahti hoon.
खड़े तो होइये, आईने के सामने हुजूर !
आईने में आप किसी अजनबी को पायेंगे !!


भागे-भागे फिर रहे हैं आईने से आप क्यों !
आईने में अपनी असलियत को ढूंढ पायेंगे !!


मैंने तो अपने हर आईने को तोड़ दिया है !
हर तरफ हो आईना तो मुस्करा न पायेंगे !!
अनुभव आपको डरपोक बनाता है
छूकर जानो आग को
पीओ और जानो प्यास को
हमने बताया और तुमने मान लिया
कैसे जानोगे प्यार को  ?
मरे हुओं को याद करते हैं /जो जिन्दा हैं उनकी खबर नहीं लेते
इतना ही प्यार था तो लाश को ममी बनाकर रख लेते

Tuesday, 9 April 2013

कल की चिंता
बहुत सताती है
उनको रात रात भर
नींद नहीं आती है |
कल की चिंता
बहुत सताती है
हमको रात रात भर
नींद नहीं आती है |
यह कैसी आज़ादी पाए ?
================
आज़ादी के
पैसठ साल बाद भी
सभी को न मिल पायी रोटी
जितनी भी सरकारें आयीं
सब निकलीं निकम्मी और खोटी |
जिनके घर भरे हुए थे
और भर गए
जिनके कपड़े फटे हुए थे
चूहे उनको और कुतर गए |
यह कैसी आज़ादी पाए ?
जिनके पेट भरे हुए थे
उनके पेट और फूल गए
कड़ी मेहनत से जिनको
मिलता था एक निवाला
उनकी किस्मत में मानों
पत्थर पड़ गए    |
हम यह कैसी आज़ादी पाए ?
तो धर्म अनुष्ठानों का मरा हुआ संग्रह है ...वैज्ञानिक मूल्यों के युग में धर्म हमारे कंधो पर बेताल की तरह सवार है ....बेहतर हो कि इसे उतार फेंका जाये
 
बहुतायत है ऐसे लोगों की प्यारे जो स्वयंभू बड़े बने है | मैं तो ईश्वर को नहीं मानता अब और उनसे भी किसी बड़े का आविष्कार हुआ है क्या ?
रोते होंगे गौतम बुद्ध
सोचते होंगे
क्या सिखाया था
क्या हो गए
तुम तो कसाई हो गए |
रोटी है जरूरी
==========
इसे मत समझो खानापूरी
यह है कविता से भी जरूरी
कविता किसी भूखे का
पेट नहीं भर सकती
कितनी भी सुन्दर हो लोरी
किसी भूखे को सुला नहीं सकती |
कितनी भी आकर्षक हो गोरी
किसी भूखे को लुभा नहीं सकती |
एक तरफ हो रोटी
और एक तरफ हो
चाँदी की कटोरी
यह कोई पहेली नहीं
भूखा रोटी खायेगा
चाँदी की कटोरी
भरे पेट वाला ही उठाएगा |
रोटी है 
कविता से भी जरूरी  |

Monday, 8 April 2013

सच दफ़्न नहीं होता
=============
सच को
उगल दिया होता
तो कोई गड़बड़ नहीं होती
तुम निगल गए सच और
झूठ की करते रहे उलटी |
कभी सोचा ही नहीं
जिंदगी की गाड़ी
चलने से पहले क्यों पलटी ?
सच को उगलते
सच से आँखें मिलाते
तुम जीत जाते |
तुम सच को दफनाने की
करते रहे जुगत
सच को लील गए
झूठ को उगल दिया
सच दफनाने से रह गया
अब तो कब्रिस्तान में
उसके लिए बची नहीं है
कोई जगह  |  
उन्हें जख्मों को कुरेदने की आदत है !
आँखों को आँसुओं की नहीं इजाज़त है !!

बार बार दोस्ती में नए नए घाव करते हैं !
मुझे मरहम लगाने की नहीं इजाज़त है !!

हर बार नए इलज़ाम मुझ पर लगाते हैं !
मुझे शिकायत करने की नहीं इजाज़त है !!

मैंने बनाया था जो घोसला उज़ड़ गया है !
उसे फिर से सँवारने की नहीं इजाज़त है !!

अब तो बस कब्र में ही पनाह मिलनी है !
मुझे सुकून से सोने की नहीं इजाज़त है !!

Sunday, 7 April 2013

नहीं जानता क्या लिखा है ? जो लिखा है ,मित्रों आपको परोस दिया |
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खड़े तो होइये आईने के सामने हुजूर !
अक्स में आप किसी अजनबी को पायेंगे !!

क्यों भागे भागे से फिरतें हैं आईने से आप !
इसी आईने में अपनी असली सूरत ढूंढ पायेंगे !!

मैंने तो अपनी हद में हर आईने को तोड़ दिया है !
आईना जब होगा हर तरफ तो आप मुस्करा न पायेंगे !!
 

Friday, 5 April 2013

गेरुए वस्त्र धारी
=============
गेरुए वस्त्र धारी हैं वे
तुम्हारी आस्था को
मुहं मांगी कीमत में
बेच देते हैं |
वे गुनाह पर गुनाह करते हैं और
ईश्वर की आड़ में छिप जाते हैं
मलाई खुद खाते हैं
और जूठन छोड़ जाते हैं
ईश्वर के लिए |
और तुम
प्रसाद समझ कर
उसे ग्रहण करते हो |

Tuesday, 2 April 2013

हर दिन होता है
कोई न कोई दिवस
और हम
शुभकामनायें देने के लिए
होते हैं विवश |
वैलेंटाइन डे ,गौरैय्या दिवस
हिंदी दिवस ,कविता दिवस
स्वतंत्रता दिवस ,गणतंत्र दिवस
पानी दिवस आदि..आदि |
एक दिन
सिर्फ एक दिन
शुभकामनायें देते हैं
और फिर सब भूल जाते हैं |
गौरय्या दिवस पर
दाना देते हैं
पिलाते है पानी
और उसके बाद
कौन गौरय्या ?
कैसी गौरय्या ?
गौरय्या की कम होती तादाद
एक सवाल खड़ा करती है
गौरय्या प्यास से क्यों मरती है ?
स्वतंत्रता दिवस और गणतंत्र दिवस पर
सरकारी कार्यक्रमों में
मजबूरीवश शामिल होते हैं
हम खुशियाँ नहीं मनाते
आज़ादी के बाद से
तंत्र हुआ मजबूत
और स्वतंत्र हो गया
गण को पकड़ा दिए गए
खोखले मंत्र  |

हिंदी दिवस पर
शुभकामनायें देते हैं
"हैप्पी हिंदी डे " कहकर
और अपने बच्चों को
अंग्रेजी स्कूलों में
पढ़ने भेज देते हैं |
वैलेंटाइन डे यानि की प्रेम दिवस पर
शुभकामनायें देते हैं
और लड़कों से कहते हैं कि
जाओ खूब मनाओ प्रेम दिवस
और लड़की को देहरी से बाहर
पाँव निकालने की मुनादी  |

कविता दिवस पर
मेरे बाबा
बार-बार पूछते रहे कि
यह वही लड़की है न
जिसे बलात्कार के बाद
दरिंदों ने
मौत के घाट उतार दिया था
और पुलिस ने उस लड़की को
बदचलन करार दिया था |
लो भाई लो
अब जल दिवस को भी झेलो
स्वच्छ गंगा
स्वच्छ यमुना चिल्लाओ
और फिर उन्हीं के किनारे
बड़े बड़े मेले लगवाओ |
आईये
शुभकामनायें देने की
औपचारिकता निभाते रहें
कविता ,प्रेम ,स्त्री ,गौरय्या
जल और हिंदी आदि की
बदहाली पर घड़ियाली आंसू बहाते रहें

Monday, 1 April 2013

विपदा बड़ी हो
तो वह अचानक
बौनी हो जाती है
और शिर्डी के साईं बाबा
के घर दौड़ी चली जाती है |
उसका विश्वास है कि
बाबा विपदाओं को
दूर भगा देते हैं और
हमारी मुस्कराहट
ज्यों का त्यों लौटा देते हैं |
विपदा जैसे ही दूर होती है
वह अपना खोया हुआ क़द
फिर प्राप्त कर लेती है
और फिर
छोटी छोटी समस्याओं का पिटारा
हमारे सिर पर दे मारती है
उसका कहना है कि
इन छोटी छोटी समस्याओं को
आपको ही निपटाना है
बाबा बड़े हैं
उनके पास
हम छोटी छोटी समस्याओं
को लेकर नहीं जायेंगे 
इन्हें तो छोटे बाबा
यानि की आप ही निपटायेंगे |      
ईश्वर से मुक्ति
==========
अच्छा किया
जो उनको अलविदा कह दिया
वर्ना बेवजह
वह बहुत परेशान करते |
अगर गलती से
पूछ लेते " एक गिलास पानी "
तो जिंदगी भर की
हो जाती परेशानी  |
अच्छा किया
जो उनको अलविदा कह दिया
यह आदत बहुत पुरानी है/ हम जो नहीं हैं वही दिखाते हैं / चेहरे पर तमाम सा रंग रोगन लगते हैं / और हर बार बुद्धू घर को लौट आतें हैं |