स्त्री के विरुद्ध लिखो तो स्त्री को बचाने आ जाते हैं सब के सब | पुरुष के विरुद्ध लिखो तो सब के सब आ जाते हैं पुरुष को बचाने के लिए | स्त्री के पक्ष में लिखो तो स्त्रियों का समर्थन कम पुरुषों का समर्थन १०० प्रतिशत | यह जो स्त्रियों के ऊपर अत्याचार हो रहा है या होता है पुरुषों द्वारा वे पुरुष आखिर सौरमंडल के किस ग्रह से आते है ?
Friday, 26 April 2013
Monday, 22 April 2013
"कन्यादान" करके बेटी को वस्तु तो आप बना ही देते हैं और फिर रोते हैं | क्यों भूल जाते है कि दान वस्तु का किया जाता है व्यक्ति का नहीं ?कन्यादान महादान कहकर आपको बरगलाया गया आप खुश हुए कि इस महादान का कुछ पुण्य तो आपको मिलेगा ही |
कन्या को पराया धन कहा जाता है क्यों ? कन्या को माता पिता के क्रियाकर्म करने का अधिकार नहीं दिया गया ,आखिर क्यों ? विधवा स्त्री को किसी तथाकथित शुभ कार्य में शामिल होने की मनाही क्यों ? बेटियों तुम सवाल क्यों नहीं करती ? सवाल करो जवाब तुम्हें खुद में तलाशना है | बहुत बेदर्दी से डाली गयी हैं बेड़ियाँ तुम्हारे पैरों में ,बेड़ियों को उतार फेको और याद रक्खो कि तुम जननी हो |
कन्या को पराया धन कहा जाता है क्यों ? कन्या को माता पिता के क्रियाकर्म करने का अधिकार नहीं दिया गया ,आखिर क्यों ? विधवा स्त्री को किसी तथाकथित शुभ कार्य में शामिल होने की मनाही क्यों ? बेटियों तुम सवाल क्यों नहीं करती ? सवाल करो जवाब तुम्हें खुद में तलाशना है | बहुत बेदर्दी से डाली गयी हैं बेड़ियाँ तुम्हारे पैरों में ,बेड़ियों को उतार फेको और याद रक्खो कि तुम जननी हो |
मैं कहता हूँ कि अब हमें बलात्कार के लिए तलाशना होगा कोई नया शब्द | इस शब्द बलात्कार से अब दुर्गन्ध आने लगी है और इसके लिये हुक्मरानों ने बड़ी सख्त सजाओं का प्रावधान भी कर दिया है |देश के बुद्धिजीवियों और हुक्मरानों से मेरा विनम्र अनुरोध है कि बलात्कार के लिए कोई नया शब्द गढ़ें इससे कई फायदे होंगे | बलात्कार के स्थानापन्न शब्द की खोज होते ही बलात्कार के लिए बने सभी कानूनों की वैधता समाप्त हो जायेगी और इस बाबत नया कानून बनाने में जो वक़्त लगेगा उस वक़्त में बलात्कारियों को बलात्कार करने की सुविधा उपलब्ध हो जायेगी |
Sunday, 21 April 2013
बलात्कार उसके साथ क्यों ?
===================
भूखा भेड़िया
सदियों तक नहीं होगा तृप्त
इसका मतलब
बेटियाँ बलात्कार के लिए हैं अभिशप्त
इसबार यह सब उसके साथ हुआ
जो नहीं जानती
आदमी और औरत का फर्क
वह नहीं जानती
अस्मत के लुट जाने का अर्थ
वह जानती है सिर्फ दर्द
अपने पिता से
वह टांगों के बीच
दर्द होने की बात कहती है
और चीख चीख कर रोती है |
पिता बच्ची से
आँख नहीं मिला पाता है
आईने में देखता है जब खुद को
सामने एक मर्द खड़ा पाता है |
सोचो क्या होगा
जब एक बेटी की माँ
बेटी के पिता को
शक की निगाह से देखेगी
और पिता से
दूर रहने की हिदायत बेटी को देगी |
===================
भूखा भेड़िया
सदियों तक नहीं होगा तृप्त
इसका मतलब
बेटियाँ बलात्कार के लिए हैं अभिशप्त
इसबार यह सब उसके साथ हुआ
जो नहीं जानती
आदमी और औरत का फर्क
वह नहीं जानती
अस्मत के लुट जाने का अर्थ
वह जानती है सिर्फ दर्द
अपने पिता से
वह टांगों के बीच
दर्द होने की बात कहती है
और चीख चीख कर रोती है |
पिता बच्ची से
आँख नहीं मिला पाता है
आईने में देखता है जब खुद को
सामने एक मर्द खड़ा पाता है |
सोचो क्या होगा
जब एक बेटी की माँ
बेटी के पिता को
शक की निगाह से देखेगी
और पिता से
दूर रहने की हिदायत बेटी को देगी |
Saturday, 20 April 2013
Friday, 19 April 2013
Tuesday, 16 April 2013
Monday, 15 April 2013
Sunday, 14 April 2013
मत बाटो प्रथ्वी को
==============
पूरी प्रथ्वी खेमों में बटी है
इसीलिए सहमी सहमी सी है प्रथ्वी
प्रथ्वी को बाँट दिया
देश की सीमाओं में घेरकर
फिर देश को बाँट दिया
चार दिशाओं के नामपर |
सीमाएं सहमी सहमी सी हैं
दिशायें सहमी सहमी सी हैं
देश बँट गए खेमों में
और यह सारा उत्पात
मचा हुआ है जो इस प्रथ्वी पर
इन्ही खेमों की देन है
आप गौर से देखिये
तो हर खेमा एक ओसामा बिन लादेन है |
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पूरी प्रथ्वी खेमों में बटी है
इसीलिए सहमी सहमी सी है प्रथ्वी
प्रथ्वी को बाँट दिया
देश की सीमाओं में घेरकर
फिर देश को बाँट दिया
चार दिशाओं के नामपर |
सीमाएं सहमी सहमी सी हैं
दिशायें सहमी सहमी सी हैं
देश बँट गए खेमों में
और यह सारा उत्पात
मचा हुआ है जो इस प्रथ्वी पर
इन्ही खेमों की देन है
आप गौर से देखिये
तो हर खेमा एक ओसामा बिन लादेन है |
Saturday, 13 April 2013
प्यार करो
================
बस भी करो मित्रों
अपने प्यार की कहानी लिखना
प्यार करने की जरूरत है
और हम अपना सारा वक़्त
प्यार के नगमें लिखने में
कर रहे है खर्च |
बहुत लिखे गए प्यार के गीत
निभाई गयी रीति
अपने भीतर प्यार भरो
देखो ,तीसरा विश्व युद्ध दस्तक दे रहा है
प्यार करो ,प्यार करो
अपने भीतर प्यार भरो
अगर रोकना है एक और विश्व युद्ध
================
बस भी करो मित्रों
अपने प्यार की कहानी लिखना
प्यार करने की जरूरत है
और हम अपना सारा वक़्त
प्यार के नगमें लिखने में
कर रहे है खर्च |
बहुत लिखे गए प्यार के गीत
निभाई गयी रीति
अपने भीतर प्यार भरो
देखो ,तीसरा विश्व युद्ध दस्तक दे रहा है
प्यार करो ,प्यार करो
अपने भीतर प्यार भरो
अगर रोकना है एक और विश्व युद्ध
Friday, 12 April 2013
हमने अपनी सुरक्षा के लिए एक ईश्वर को पैदा कर लिया है और सारी ताकत ईश्वर को सौंप दी और कहा कि तुम से ज्यादा शक्तिशाली कौन हो सकता है, तुम्हें ही लड़ना है मेरे लिए, मैं बस मंदिरों में घंटियाँ बजाता हूँ,मंदिरों में भजन कीर्तन करता हूँ तथा अपनी अपनी सामर्थ्य के अनुसार ईश्वर को घूस देकर हम निश्चिंत हो जाते हैं |
अगर ईश्वर को आप सर्वशक्तिमान मानते हैं तो आप भूलिए मत कि वह महाबुद्धिमान भी है, उसे आप बेवकूफ़ नहीं बना सकते। आप मंदिरों में घंटियाँ बजाएँ और वह आपके लिए लड़ता फ़िरे! तभी तो ईश्वर ने हमें हमारे हाल पर छोड़ दिया और हम सदियों तक गुलाम रहे।
इसलिए ईश्वर को भूल जाइये और याद रखिये कि आपको अपनी लड़ाई खुद लड़नी है |
अगर ईश्वर को आप सर्वशक्तिमान मानते हैं तो आप भूलिए मत कि वह महाबुद्धिमान भी है, उसे आप बेवकूफ़ नहीं बना सकते। आप मंदिरों में घंटियाँ बजाएँ और वह आपके लिए लड़ता फ़िरे! तभी तो ईश्वर ने हमें हमारे हाल पर छोड़ दिया और हम सदियों तक गुलाम रहे।
इसलिए ईश्वर को भूल जाइये और याद रखिये कि आपको अपनी लड़ाई खुद लड़नी है |
Thursday, 11 April 2013
कैसे सोचते हो ?
================
हिन्दू , हिन्दू की तरह न सोचे
मुसलमान , मुसलमान की तरह न सोचे
हमें चाहिए ऐसे लोग
जो इंसान की तरह सोचें |
वे लोग
जो हिन्दुओं को बरगलाते हैं
हिन्दुओं की तरह सोचने के लिए
मुसलमानों को बाध्य करते हैं
मुसलमान की तरह सोचने के लिए
और देखते हैं अखंड भारत का सपना
हमें इंसानियत को बचाना है
दोगलापन छोड़कर
आईने के सामने आना है |
तुम्हें देखकर
जब आईना मुस्कराएगा
तब हमारा देश
एक बार फिर
विश्व गुरु कहलाएगा |
================
हिन्दू , हिन्दू की तरह न सोचे
मुसलमान , मुसलमान की तरह न सोचे
हमें चाहिए ऐसे लोग
जो इंसान की तरह सोचें |
वे लोग
जो हिन्दुओं को बरगलाते हैं
हिन्दुओं की तरह सोचने के लिए
मुसलमानों को बाध्य करते हैं
मुसलमान की तरह सोचने के लिए
और देखते हैं अखंड भारत का सपना
हमें इंसानियत को बचाना है
दोगलापन छोड़कर
आईने के सामने आना है |
तुम्हें देखकर
जब आईना मुस्कराएगा
तब हमारा देश
एक बार फिर
विश्व गुरु कहलाएगा |
नवरात्रि का पहला दिन ,तमाम से ढकोसले शुरू ===
१) एक नवयुवक कुछ दिन पहले मिला उसे किसी से प्यार हो गया था परेशान था,मैंने कहा कि क्या दिक्कत है अपने प्यार का इज़हार कर दो तो उसने कहा कि नहीं अंकल अभी दिन ठीक नहीं चल रहे है सोचता हूँ की नवरात्रि के दिनों में अपने प्यार का इज़हार करूँ |
२) पिछले एक हफ्ते से मेरी पत्नी बच्चों को चिल्ला चिल्ला कर कह रही थी कि रोज चिकन और मटन खा लो फिर नौ दिन घर में कुछ नहीं बनेगा |
३) पति पत्नी नौ दिन का व्रत रखते हैं और इन दिनों उन्हें एक बिस्तर पर लेटने की मनाही होती है यानि कि कोई प्यार नहीं होगा |
४) कुछ लोग जो निर्जल व्रत रखतें हैं उनमें अहंकार अपने चरम पर होता हैं ,श्रीमती दुर्गा के वाहन शेर पर सवार होकर ऐसा लगता है कि विश्व विजय करके ही वापस आयेंगे |
कहने को तो अभी बहुत कुछ है लेकिन इतना यह साबित करने के लिए पर्याप्त है कि "हम किसी से कम नहीं "
१) एक नवयुवक कुछ दिन पहले मिला उसे किसी से प्यार हो गया था परेशान था,मैंने कहा कि क्या दिक्कत है अपने प्यार का इज़हार कर दो तो उसने कहा कि नहीं अंकल अभी दिन ठीक नहीं चल रहे है सोचता हूँ की नवरात्रि के दिनों में अपने प्यार का इज़हार करूँ |
२) पिछले एक हफ्ते से मेरी पत्नी बच्चों को चिल्ला चिल्ला कर कह रही थी कि रोज चिकन और मटन खा लो फिर नौ दिन घर में कुछ नहीं बनेगा |
३) पति पत्नी नौ दिन का व्रत रखते हैं और इन दिनों उन्हें एक बिस्तर पर लेटने की मनाही होती है यानि कि कोई प्यार नहीं होगा |
४) कुछ लोग जो निर्जल व्रत रखतें हैं उनमें अहंकार अपने चरम पर होता हैं ,श्रीमती दुर्गा के वाहन शेर पर सवार होकर ऐसा लगता है कि विश्व विजय करके ही वापस आयेंगे |
कहने को तो अभी बहुत कुछ है लेकिन इतना यह साबित करने के लिए पर्याप्त है कि "हम किसी से कम नहीं "
Wednesday, 10 April 2013
मेरी ग़ज़ल को मित्र मनिका मोहिनी ने सुधार कर उसमें वज़न पैदा कर दिया है मैं उस ग़ज़ल को उनके मैसेज के साथ पुनः पोस्ट कर रहा हूँ इसके लिए मैं उनका आभारी हूँ ,मनिका मोहनी जी आपके कमेंट मुझे ऐसे ही मिलते रहेगे यह मेरा विश्वास है ,धन्यवाद
Avdhesh bhaai, jo aapne aaine wali gazal likhi hai, bura na maane to kahun ki uski lines me vazan sahi nahi baithh raha islie rhythm sahi nahi aa raha. Maine sirf vazan thheek karne ki koshish ki hai, bataaen ki kaisi lagi? Bura laga ho to kshama chahti hoon.
खड़े तो होइये, आईने के सामने हुजूर !
आईने में आप किसी अजनबी को पायेंगे !!
भागे-भागे फिर रहे हैं आईने से आप क्यों !
आईने में अपनी असलियत को ढूंढ पायेंगे !!
मैंने तो अपने हर आईने को तोड़ दिया है !
हर तरफ हो आईना तो मुस्करा न पायेंगे !!
Avdhesh bhaai, jo aapne aaine wali gazal likhi hai, bura na maane to kahun ki uski lines me vazan sahi nahi baithh raha islie rhythm sahi nahi aa raha. Maine sirf vazan thheek karne ki koshish ki hai, bataaen ki kaisi lagi? Bura laga ho to kshama chahti hoon.
खड़े तो होइये, आईने के सामने हुजूर !
आईने में आप किसी अजनबी को पायेंगे !!
भागे-भागे फिर रहे हैं आईने से आप क्यों !
आईने में अपनी असलियत को ढूंढ पायेंगे !!
मैंने तो अपने हर आईने को तोड़ दिया है !
हर तरफ हो आईना तो मुस्करा न पायेंगे !!
Tuesday, 9 April 2013
यह कैसी आज़ादी पाए ?
================
आज़ादी के
पैसठ साल बाद भी
सभी को न मिल पायी रोटी
जितनी भी सरकारें आयीं
सब निकलीं निकम्मी और खोटी |
जिनके घर भरे हुए थे
और भर गए
जिनके कपड़े फटे हुए थे
चूहे उनको और कुतर गए |
यह कैसी आज़ादी पाए ?
जिनके पेट भरे हुए थे
उनके पेट और फूल गए
कड़ी मेहनत से जिनको
मिलता था एक निवाला
उनकी किस्मत में मानों
पत्थर पड़ गए |
हम यह कैसी आज़ादी पाए ?
================
आज़ादी के
पैसठ साल बाद भी
सभी को न मिल पायी रोटी
जितनी भी सरकारें आयीं
सब निकलीं निकम्मी और खोटी |
जिनके घर भरे हुए थे
और भर गए
जिनके कपड़े फटे हुए थे
चूहे उनको और कुतर गए |
यह कैसी आज़ादी पाए ?
जिनके पेट भरे हुए थे
उनके पेट और फूल गए
कड़ी मेहनत से जिनको
मिलता था एक निवाला
उनकी किस्मत में मानों
पत्थर पड़ गए |
हम यह कैसी आज़ादी पाए ?
रोटी है जरूरी
==========
इसे मत समझो खानापूरी
यह है कविता से भी जरूरी
कविता किसी भूखे का
पेट नहीं भर सकती
कितनी भी सुन्दर हो लोरी
किसी भूखे को सुला नहीं सकती |
कितनी भी आकर्षक हो गोरी
किसी भूखे को लुभा नहीं सकती |
एक तरफ हो रोटी
और एक तरफ हो
चाँदी की कटोरी
यह कोई पहेली नहीं
भूखा रोटी खायेगा
चाँदी की कटोरी
भरे पेट वाला ही उठाएगा |
रोटी है
कविता से भी जरूरी |
==========
इसे मत समझो खानापूरी
यह है कविता से भी जरूरी
कविता किसी भूखे का
पेट नहीं भर सकती
कितनी भी सुन्दर हो लोरी
किसी भूखे को सुला नहीं सकती |
कितनी भी आकर्षक हो गोरी
किसी भूखे को लुभा नहीं सकती |
एक तरफ हो रोटी
और एक तरफ हो
चाँदी की कटोरी
यह कोई पहेली नहीं
भूखा रोटी खायेगा
चाँदी की कटोरी
भरे पेट वाला ही उठाएगा |
रोटी है
कविता से भी जरूरी |
Monday, 8 April 2013
सच दफ़्न नहीं होता
=============
सच को
उगल दिया होता
तो कोई गड़बड़ नहीं होती
तुम निगल गए सच और
झूठ की करते रहे उलटी |
कभी सोचा ही नहीं
जिंदगी की गाड़ी
चलने से पहले क्यों पलटी ?
सच को उगलते
सच से आँखें मिलाते
तुम जीत जाते |
तुम सच को दफनाने की
करते रहे जुगत
सच को लील गए
झूठ को उगल दिया
सच दफनाने से रह गया
अब तो कब्रिस्तान में
उसके लिए बची नहीं है
कोई जगह |
=============
सच को
उगल दिया होता
तो कोई गड़बड़ नहीं होती
तुम निगल गए सच और
झूठ की करते रहे उलटी |
कभी सोचा ही नहीं
जिंदगी की गाड़ी
चलने से पहले क्यों पलटी ?
सच को उगलते
सच से आँखें मिलाते
तुम जीत जाते |
तुम सच को दफनाने की
करते रहे जुगत
सच को लील गए
झूठ को उगल दिया
सच दफनाने से रह गया
अब तो कब्रिस्तान में
उसके लिए बची नहीं है
कोई जगह |
उन्हें जख्मों को कुरेदने की आदत है !
आँखों को आँसुओं की नहीं इजाज़त है !!
बार बार दोस्ती में नए नए घाव करते हैं !
मुझे मरहम लगाने की नहीं इजाज़त है !!
हर बार नए इलज़ाम मुझ पर लगाते हैं !
मुझे शिकायत करने की नहीं इजाज़त है !!
मैंने बनाया था जो घोसला उज़ड़ गया है !
उसे फिर से सँवारने की नहीं इजाज़त है !!
अब तो बस कब्र में ही पनाह मिलनी है !
मुझे सुकून से सोने की नहीं इजाज़त है !!
आँखों को आँसुओं की नहीं इजाज़त है !!
बार बार दोस्ती में नए नए घाव करते हैं !
मुझे मरहम लगाने की नहीं इजाज़त है !!
हर बार नए इलज़ाम मुझ पर लगाते हैं !
मुझे शिकायत करने की नहीं इजाज़त है !!
मैंने बनाया था जो घोसला उज़ड़ गया है !
उसे फिर से सँवारने की नहीं इजाज़त है !!
अब तो बस कब्र में ही पनाह मिलनी है !
मुझे सुकून से सोने की नहीं इजाज़त है !!
Sunday, 7 April 2013
नहीं जानता क्या लिखा है ? जो लिखा है ,मित्रों आपको परोस दिया |
======================================================
खड़े तो होइये आईने के सामने हुजूर !
अक्स में आप किसी अजनबी को पायेंगे !!
क्यों भागे भागे से फिरतें हैं आईने से आप !
इसी आईने में अपनी असली सूरत ढूंढ पायेंगे !!
मैंने तो अपनी हद में हर आईने को तोड़ दिया है !
आईना जब होगा हर तरफ तो आप मुस्करा न पायेंगे !!
======================================================
खड़े तो होइये आईने के सामने हुजूर !
अक्स में आप किसी अजनबी को पायेंगे !!
क्यों भागे भागे से फिरतें हैं आईने से आप !
इसी आईने में अपनी असली सूरत ढूंढ पायेंगे !!
मैंने तो अपनी हद में हर आईने को तोड़ दिया है !
आईना जब होगा हर तरफ तो आप मुस्करा न पायेंगे !!
Friday, 5 April 2013
Tuesday, 2 April 2013
हर दिन होता है
कोई न कोई दिवस
और हम
शुभकामनायें देने के लिए
होते हैं विवश |
वैलेंटाइन डे ,गौरैय्या दिवस
हिंदी दिवस ,कविता दिवस
स्वतंत्रता दिवस ,गणतंत्र दिवस
पानी दिवस आदि..आदि |
एक दिन
सिर्फ एक दिन
शुभकामनायें देते हैं
और फिर सब भूल जाते हैं |
गौरय्या दिवस पर
दाना देते हैं
पिलाते है पानी
और उसके बाद
कौन गौरय्या ?
कैसी गौरय्या ?
गौरय्या की कम होती तादाद
एक सवाल खड़ा करती है
गौरय्या प्यास से क्यों मरती है ?
स्वतंत्रता दिवस और गणतंत्र दिवस पर
सरकारी कार्यक्रमों में
मजबूरीवश शामिल होते हैं
हम खुशियाँ नहीं मनाते
आज़ादी के बाद से
तंत्र हुआ मजबूत
और स्वतंत्र हो गया
गण को पकड़ा दिए गए
खोखले मंत्र |
हिंदी दिवस पर
शुभकामनायें देते हैं
"हैप्पी हिंदी डे " कहकर
और अपने बच्चों को
अंग्रेजी स्कूलों में
पढ़ने भेज देते हैं |
वैलेंटाइन डे यानि की प्रेम दिवस पर
शुभकामनायें देते हैं
और लड़कों से कहते हैं कि
जाओ खूब मनाओ प्रेम दिवस
और लड़की को देहरी से बाहर
पाँव निकालने की मुनादी |
कविता दिवस पर
मेरे बाबा
बार-बार पूछते रहे कि
यह वही लड़की है न
जिसे बलात्कार के बाद
दरिंदों ने
मौत के घाट उतार दिया था
और पुलिस ने उस लड़की को
बदचलन करार दिया था |
लो भाई लो
अब जल दिवस को भी झेलो
स्वच्छ गंगा
स्वच्छ यमुना चिल्लाओ
और फिर उन्हीं के किनारे
बड़े बड़े मेले लगवाओ |
आईये
शुभकामनायें देने की
औपचारिकता निभाते रहें
कविता ,प्रेम ,स्त्री ,गौरय्या
जल और हिंदी आदि की
बदहाली पर घड़ियाली आंसू बहाते रहें
कोई न कोई दिवस
और हम
शुभकामनायें देने के लिए
होते हैं विवश |
वैलेंटाइन डे ,गौरैय्या दिवस
हिंदी दिवस ,कविता दिवस
स्वतंत्रता दिवस ,गणतंत्र दिवस
पानी दिवस आदि..आदि |
एक दिन
सिर्फ एक दिन
शुभकामनायें देते हैं
और फिर सब भूल जाते हैं |
गौरय्या दिवस पर
दाना देते हैं
पिलाते है पानी
और उसके बाद
कौन गौरय्या ?
कैसी गौरय्या ?
गौरय्या की कम होती तादाद
एक सवाल खड़ा करती है
गौरय्या प्यास से क्यों मरती है ?
स्वतंत्रता दिवस और गणतंत्र दिवस पर
सरकारी कार्यक्रमों में
मजबूरीवश शामिल होते हैं
हम खुशियाँ नहीं मनाते
आज़ादी के बाद से
तंत्र हुआ मजबूत
और स्वतंत्र हो गया
गण को पकड़ा दिए गए
खोखले मंत्र |
हिंदी दिवस पर
शुभकामनायें देते हैं
"हैप्पी हिंदी डे " कहकर
और अपने बच्चों को
अंग्रेजी स्कूलों में
पढ़ने भेज देते हैं |
वैलेंटाइन डे यानि की प्रेम दिवस पर
शुभकामनायें देते हैं
और लड़कों से कहते हैं कि
जाओ खूब मनाओ प्रेम दिवस
और लड़की को देहरी से बाहर
पाँव निकालने की मुनादी |
कविता दिवस पर
मेरे बाबा
बार-बार पूछते रहे कि
यह वही लड़की है न
जिसे बलात्कार के बाद
दरिंदों ने
मौत के घाट उतार दिया था
और पुलिस ने उस लड़की को
बदचलन करार दिया था |
लो भाई लो
अब जल दिवस को भी झेलो
स्वच्छ गंगा
स्वच्छ यमुना चिल्लाओ
और फिर उन्हीं के किनारे
बड़े बड़े मेले लगवाओ |
आईये
शुभकामनायें देने की
औपचारिकता निभाते रहें
कविता ,प्रेम ,स्त्री ,गौरय्या
जल और हिंदी आदि की
बदहाली पर घड़ियाली आंसू बहाते रहें
Monday, 1 April 2013
विपदा बड़ी हो
तो वह अचानक
बौनी हो जाती है
और शिर्डी के साईं बाबा
के घर दौड़ी चली जाती है |
उसका विश्वास है कि
बाबा विपदाओं को
दूर भगा देते हैं और
हमारी मुस्कराहट
ज्यों का त्यों लौटा देते हैं |
विपदा जैसे ही दूर होती है
वह अपना खोया हुआ क़द
फिर प्राप्त कर लेती है
और फिर
छोटी छोटी समस्याओं का पिटारा
हमारे सिर पर दे मारती है
उसका कहना है कि
इन छोटी छोटी समस्याओं को
आपको ही निपटाना है
बाबा बड़े हैं
उनके पास
हम छोटी छोटी समस्याओं
को लेकर नहीं जायेंगे
इन्हें तो छोटे बाबा
यानि की आप ही निपटायेंगे |
तो वह अचानक
बौनी हो जाती है
और शिर्डी के साईं बाबा
के घर दौड़ी चली जाती है |
उसका विश्वास है कि
बाबा विपदाओं को
दूर भगा देते हैं और
हमारी मुस्कराहट
ज्यों का त्यों लौटा देते हैं |
विपदा जैसे ही दूर होती है
वह अपना खोया हुआ क़द
फिर प्राप्त कर लेती है
और फिर
छोटी छोटी समस्याओं का पिटारा
हमारे सिर पर दे मारती है
उसका कहना है कि
इन छोटी छोटी समस्याओं को
आपको ही निपटाना है
बाबा बड़े हैं
उनके पास
हम छोटी छोटी समस्याओं
को लेकर नहीं जायेंगे
इन्हें तो छोटे बाबा
यानि की आप ही निपटायेंगे |
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