Sunday, 7 April 2013

नहीं जानता क्या लिखा है ? जो लिखा है ,मित्रों आपको परोस दिया |
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खड़े तो होइये आईने के सामने हुजूर !
अक्स में आप किसी अजनबी को पायेंगे !!

क्यों भागे भागे से फिरतें हैं आईने से आप !
इसी आईने में अपनी असली सूरत ढूंढ पायेंगे !!

मैंने तो अपनी हद में हर आईने को तोड़ दिया है !
आईना जब होगा हर तरफ तो आप मुस्करा न पायेंगे !!
 

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