सपने अब नहीं आते
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अब सपने
मेरे पास नहीं आते
मैं जाता हूँ सपनों के पास
हाथ जोड़ता, गिड़गिडाता
दुतकारतें हैं सपने
पुचकारते थे कभी
नींद के साथ चले आते थे
चुपचाप सपने |
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अब सपने
मेरे पास नहीं आते
मैं जाता हूँ सपनों के पास
हाथ जोड़ता, गिड़गिडाता
दुतकारतें हैं सपने
पुचकारते थे कभी
नींद के साथ चले आते थे
चुपचाप सपने |
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