Saturday, 26 November 2016

अचार में फफूंद
तालाब में काई सा है "प्रेम" | 

Thursday, 24 November 2016

प्रेम को महिमा मंडित करने की कोशिश
वास्तव में होती है देह पाने की साज़िश |
तुम्हारे हिस्से का सुख बट जाता है
तुम्हारे हिस्से का दुःख बाटनें कोई नहीं आता है
वह तुम्हारे हिस्से के सुख को बटनें से रोकना चाहता है |
अचार में लगी फफूंद सा है प्रेम | फफूंद को हटाकर अचार को  कुछ दिनों के लिए धूप में रखिये, अचार खाने लायक हो जाता है | 

Monday, 14 November 2016

नाराज़ होना
या खुश होना
अब मुझे नहीं आता
रास्ते में जो भी मिलता है
उसे देखकर मुस्कराना मेरी आदत है |  

Sunday, 6 November 2016

काश,
होता मेरा सारा आकाश
आकाश में उग आती थोड़ी सी घास, काश |

Saturday, 5 November 2016

अगर रविश पत्रकारिता (एनडीटीवी) के माध्यम से राजनीति में अपनी भागीदारी सुनिश्चित कर रहे है तो इसमे गलत क्या है ? जनांदोलन की भविष्यवाणी की जा रही है नायक की खोज जारी है और रविश में किसी भी जनांदोलन का नायक बनने की खूबियां सारी हैं | रविश जी, शपथ लें , अगर भविष्य में आप किसी जनांदोलन के नायक बनें तो अन्ना की तरह किसी केजरीवाल को पैदा करने का गुनाह नहीं करेंगे |
कृपया इसे व्यंग न समझें |
केवल वामपंथी मुखौटा है
सबके सब उनकी अगुवाई में खड़े हैं
जिनके काँधे पर है जनेऊ और हाथ में लोटा है | 

Tuesday, 1 November 2016

वे नहीं सोचेंगे क्योंकि इंसान होने से पहले वे हिन्दू या मुसलमान हैं | एक नेता ही है जो न हिन्दू है न मुसलमान है | नेता धर्म की आग पर सेंकता है रोटियां और बड़े प्यार से कभी आपको और कभी हमें खिलाता है,इंसान या इंसानियत से नहीं होता नेता का कोई नाता |