Friday, 30 September 2016

जिनके लिए लिखा था ख़त
उन तक नहीं पँहुचा आजतक
करते है इंतज़ार जवाब का
सुबह से शाम तक || 

Wednesday, 28 September 2016

ऐसे भी बादल होते हैं
जो न गरजते हैं, न बरसते हैं
सूरज की रोशनी को रोकते हैं |
बादलों गरजो तो चाहे न बरसो
तुम्हारी गर्जना में
बारिश की संभावना छिपी होती है |
  

Tuesday, 27 September 2016

यौवन इतिहास क्या हुआ
जिस्म का भूगोल ही बदल गया | 

Monday, 26 September 2016

मेरे बेटे अशांत मोहन निगम को मिस्टर फिटनेस किंग ऑफ़ वाराणसी का ख़िताब जीतने पर ढेरों बधाइयां एवं शुभकामनायें | वीर तुम बढ़े चलो |
भाषा में व्यक्त झूठ के सामने 
मौन का सच बौना हो जाता है
मौन थककर अनभिव्यक्त सो जाता है |
मेरा बाप हीरा था
माँ ने उसे कोयला बना दिया
मेरी माँ कोयला थी
मेरे बाप ने उसे हीरा बना दिया
मेरे घर की सम्पन्नता में कोई फर्क़ नहीं आया |

Friday, 23 September 2016

वेदों में ईंट का जवाब पत्थर से देने का प्रावधान तो है लेकिन अगर कोई पत्थर से मारे तो क्या करना चाहिए इस बारे में कोई उल्लेख नहीं मिलता है इसलिए फिलहाल दोषियों को बक्शा नहीं जाएगा से काम चलाइये और पाकिस्तान के खिलाफ सबूत इकठ्ठा करके अंतराष्ट्रीय समुदाय के समक्ष प्रस्तुत करते रहिये,
अरे घुस के मारो सरकार 
पाकिस्तान के टुकड़े कर दो चार |
भरे पेट की भाषा है प्रेम 
भूखा न पूछे कुशल क्षेम |
जैसी तुम्हारी शाम होती है
वैसी ही हमारी शाम होती है |
,
बदलता कुछ भी नहीं जिंदगी में
जिंदगी सबकी योहीं तमाम होती है |

नैतिकता के नियम बदल गए है सभी
अब तो चोरी भी खुले-आम होती है |

Saturday, 10 September 2016

शरीर में नहीं रही अब जान 
जिस्म बन गया है हिंदुस्तान |

शेर को मारना कानूनन जुर्म है लेकिन जब शेर आदमखोर हो जाता है तो क़ानून शेर को मारने की इजाजत देता है | अगर गौरक्षा के नाम पर इंसानी खून का एक कतरा भी गिरता है तो यह मानना ही होगा कि हमारे देश की गाय आदमखोर हो गयी है |

जम गई है बर्फ
पिघलने दो
फासले मत बढ़ने दो |

वक्त बदल गया है,अब हमारे मुल्क में वे लोग महान मानें जाते हैं जिनके दामन पर भ्रष्टाचार के गन्दे और नापाक ढेरों छीटे हैं | असहमत हों तो कृपया अपनी असहमति प्रगट करें |

शव यात्रा में शामिल वे लोग
राम नाम सत्य है का नारा लगा रहे थे
और मरनेवाले को
मन ही मन गरिया रहे थे
उसकी मौत पर 
जब चीखकर मैंने कहा=
"अच्छा हुआ तुम उठ गए हो दुष्ट"
वे कमीने
बेवजह हो गये मुझसे रुष्ट
शव यात्रा में शामिल लोग जानते हैं
लाश को कन्धा देने से कंधे होते हैं पुष्ट |
( "अच्छा हुआ तुम उठ गए हो दुष्ट"--यह पंक्ति बाबा नागार्जुन से ली है उधार)
हम हमेशा खुद को मदारी की भूमिका में देखना चाहते हैं जबकि हम जिंदगी भर बन्दर की भूमिका निभाने के लिए अभिशप्त हैं |

बंजर खेतों में
पेड़ की छाया ढूंढते हो
नासमझ हो,
समुन्दर में किनारा ढूंढते हो |

ईश्वर अगर होता तो रस्सियों से बंधे उस बेबस पिता जिसकी 13 साल की बेटी को रोंदा जा रहा था,की फ़रियाद जरूर सुनता |

दोस्ती में बंधे रहने की विवशता नहीं होती,जहाँ बंधे रहने की विवशता होती है वहां दोस्ती नहीं होती |

तुम हमारे मन की बात नहीं सुनते 
हम तुम्हारे "मन की बात" क्यों सुने ?
बहुत शोर था कि
वह बोलता नहीं 
वह बोलता है तो वे बोलते हैं कि 
वह बोलता बहुत है 
उसकी चुप्पी चुभती है 
उसका बोलना भी चुभता है
क्योंकि
वह आधा बोलता है, आधा चुप रहता है |
रूठ जाता है बचपन 
फिर लौटकर नहीं आता 
बुढ़ापे की शक्ल में 
लौटता है मगर 
थके और उदास क़दमों से चलकर |
तुम्हारी बातें मन बहलाती तो हैं 
मरी हुई ख्वाहिशें मुस्कराती तो हैं |
आन्दोलनों के अग्रदूत वामपंथियों ने पश्चिम बंगाल का क्या हाल किया आपके सामने है | जयप्रकाश नारायण के आंदोलन से निकले शूरवीरों को आपने देखा है, अन्ना के आंदोलन का हश्र भी आपने देखा है | किसी भी दलित आंदोलन को अंततोगत्वा मायावती के चरणों में ही नतमस्तक होना है | यह ऊना ऊना क्या करते हो ?
बड़े हो जाते है लोग
दूध के दांत टूटते ही नहीं
पालना कभी छूटता ही नहीं |
माँ नें 
लोरियों का आदी बना दिया 
अनजाने में हमें अफीम चटा दिया |
अपनी आलोचना करना अगर आ जाता / सारा ज़माना खुद-ब-खुद सुधर जाता |
उड़ानों को रद्द मत करो 
परिंदे की नज़र से आकाश को तो देखो 
कूड़े के ढेर पर बैठा हुआ सूअर 
इंसान की नज़र से इंसान को तो देखो ,
विकास के नाम पर खेतों को मत उजाड़ो 
किसान की नज़र से धरती को तो देखो |
यह कौन है जो आईना दिखाता है / बदसूरत है हम कितने हमको बताता है |
तुम्हारे लिए यह जानना जरूरी है / दुश्मन नहीं है वो जो आईना दिखाता है |
आपकी यादों से 
जिसका नामोनिशान मिट जाता है 
आपके लिए वह व्यक्ति मर जाता है 
बरसों पहले की बात है 
वह मुझे भूल गया था 
शमशान के सन्नाटे में
मुझे अकेला छोड़ गया था |



कोई मुझे चाहे 
अब ये ख्वाइश भी नहीं बची 
सपनों में कोई आता 
आँखों में अब नींद ही नहीं बची |



धर्म पिता है और राजनीति पत्नी 
कृपया गिनती करके बताये कि हमारे देश में इस पत्नी के कितने पति है 
पांच पति वाली को तो पांचाली कहकर सम्मानित कर दिया 
राजनीति रूपी इस पत्नी के पतियों की संख्या निश्चित हो जाने के बाद ही इसका नामकरण संभव होगा |



चलो उस "कल" में मिलते हैं जो कभी नहीं आता |
यादें अमर नहीं होती 
अपनी उम्र भर जीती हैं ,
फिर मर जाती हैं यादें |
वोह कल भी यही सोचता था, आज भी यही सोचता है कि सच केवल वही बोलता है | सच की परिभाषा गढ़नें में उसे महारत हासिल है, उसे भ्रम है कि सच उसके साथ-साथ चलता है और केवल उसके साथ ही दौड़ता है | सबके अपने-अपने सच हैं,सबकी अपनी-अपनी सच की परिभाषा है | इतने सारे सच के बीच सच कहीं खो गया है शायद ?

एक वाक्य में कहा जाय तो हम सब दुराग्रह से ग्रस्त हैं | बुद्धिजीवियों का एक तबका सत्ताधारी पार्टी के पक्ष में खड़ा है तो दूसरा उसके विरोध में | अपने-अपने दुराग्रह के साथ भौकने की प्रतिस्पर्धा में शामिल हैं हम सब | सच के साथ कोई नहीं खड़ा है, सबकी आँखों पर एक चश्मा चढ़ा है |
वोह कल भी यही सोचता था, आज भी यही सोचता है कि सच केवल वही बोलता है | सच की परिभाषा गढ़नें में उसे महारत हासिल है, उसे भ्रम है कि सच उसके साथ-साथ चलता है और केवल उसके साथ ही दौड़ता है | सबके अपने-अपने सच हैं,सबकी अपनी-अपनी सच की परिभाषा है | इतने सारे सच के बीच सच कहीं खो गया है शायद ?

एक वाक्य में कहा जाय तो हम सब दुराग्रह से ग्रस्त हैं | बुद्धिजीवियों का एक तबका सत्ताधारी पार्टी के पक्ष में खड़ा है तो दूसरा उसके विरोध में | अपने-अपने दुराग्रह के साथ भौकने की प्रतिस्पर्धा में शामिल हैं हम सब | सच के साथ कोई नहीं खड़ा है, सबकी आँखों पर एक चश्मा चढ़ा है |
बक़रीद
कुर्बानी के नाम पर
बकरा हुआ शहीद
जन्नत पर,
जन्नत की हूरों पर
बकरे का भी तो हक़ है
या इसमें भी कोई शक़ है ?

स्वर्ग में पसरा है सन्नाटा
नरक की चौखट पर लंबी क़तारें हैं
खौलते तेल के कढ़ाहों से डर नहीं लगता
स्वर्ग में पसरे सन्नाटे से डर लगता है |