Friday, 23 September 2016

जैसी तुम्हारी शाम होती है
वैसी ही हमारी शाम होती है |
,
बदलता कुछ भी नहीं जिंदगी में
जिंदगी सबकी योहीं तमाम होती है |

नैतिकता के नियम बदल गए है सभी
अब तो चोरी भी खुले-आम होती है |

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