जैसी तुम्हारी शाम होती है
वैसी ही हमारी शाम होती है |
,
बदलता कुछ भी नहीं जिंदगी में
जिंदगी सबकी योहीं तमाम होती है |
नैतिकता के नियम बदल गए है सभी
अब तो चोरी भी खुले-आम होती है |
वैसी ही हमारी शाम होती है |
,
बदलता कुछ भी नहीं जिंदगी में
जिंदगी सबकी योहीं तमाम होती है |
नैतिकता के नियम बदल गए है सभी
अब तो चोरी भी खुले-आम होती है |
No comments:
Post a Comment