Saturday, 10 September 2016

आपकी यादों से 
जिसका नामोनिशान मिट जाता है 
आपके लिए वह व्यक्ति मर जाता है 
बरसों पहले की बात है 
वह मुझे भूल गया था 
शमशान के सन्नाटे में
मुझे अकेला छोड़ गया था |



कोई मुझे चाहे 
अब ये ख्वाइश भी नहीं बची 
सपनों में कोई आता 
आँखों में अब नींद ही नहीं बची |



धर्म पिता है और राजनीति पत्नी 
कृपया गिनती करके बताये कि हमारे देश में इस पत्नी के कितने पति है 
पांच पति वाली को तो पांचाली कहकर सम्मानित कर दिया 
राजनीति रूपी इस पत्नी के पतियों की संख्या निश्चित हो जाने के बाद ही इसका नामकरण संभव होगा |



चलो उस "कल" में मिलते हैं जो कभी नहीं आता |

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