Thursday, 31 October 2013

सोचता हूँ
दीवाली पर शुभकामनाएं देने की
औपचारिकता निभा ही दूँ |
दीप जलाऊं या न जलाऊं
अँधेरा भाग जाये
आपके जीवन से
इसका ढोंग तो रचाऊं |

हम सब
एक दूसरे को
शुभकामनाएं देते हैं
और डरते भी हैं कि
कहीं शुभकामनाएं
फलीभूत न हो जायें |

Tuesday, 29 October 2013

बालों में पसर गयी चांदी
आँखों पर चढ़ गया चश्मा
इतने बरस बीत जाने के बाद भी
तुम सुन पाती हो अपनी चीख
तुम देख पाती हो अपने आंसू
तुम समझ पाती हो अपनी भूख
नमन तुम्हारे हौसले को
चारो ओर बहरे और अन्धें हैं
और मैं इनमें शामिल हूँ |

Monday, 28 October 2013

राजेंद्र यादव को श्रद्धांजलि
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किसे नहीं सताया ?
सोते हुओं को
नींद से भी जगाया
और अब खुद सो गए
चिरनिद्रा में अकेले  |
अब तुम्हारे माथे पर
वे ढेरों मोर पंख जड़ेंगे
(मरने के बाद मोर पंख
जड़ने की परम्परा सभी निभाते हैं )
साहित्य के सिरमौर
साहित्य में सन्नाटा
असम्भव है क्षतिपूर्ति

और सबसे बड़ा प्रश्न होगा
"हंस" अब सफ़ेद कैसे दिखेगा ?  

Sunday, 27 October 2013

मेरे सपनों में
अब भी तुम आती हो
मेरे सपनों में
तुम क्यों आती हो ?

सपनों के रिश्ते भी
कितने अजीब होते हैं
जो दूर दूर तक
पास नहीं होते हैं
कितने करीब होते हैं |
पत्नी, पति से
पिता का प्यार चाहे
पति रात रात भर
भरता है आहें
कोई अगर जानता हो
तो बताए
पति इस रिश्ते को कैसे निभाए |

Saturday, 26 October 2013

काटने पर
रूलाता था प्याज
अब खरीदने पर  हैं रूलाता
मैं खुश हूँ कि
प्याज की तासीर तो नहीं बदली |
सन्नाटा जब चीखता है
दहलाता है
भीड़ में
वह डर जाता है
इसीलिए
न वह किसी के पास जाता है
और न कोई उसके पास आता है |  
पंख नहीं थे
हौसला  था तुम्हारे पास
इसीलिए भर सके
तुम ऊँची उड़ान

दूरभाष पर
सूचनाओं का आदान-प्रदान
ही केवल हो पाता
मिलो और दिल की बात सुनों

मेरे पास न पंख थे
न हौसला  था
उड़ न सका
जमीन पर रेंगता रहा
सच कहा तुमने
हसरत अभी बाकी है |

Tuesday, 22 October 2013

मेरा प्यार तुम तक
वाया किसी तीसरे के आया
तुम्हारा प्यार मुझ तक
धोबी-घाट पर धुलकर आया
इसीलिए तो
मेरे और तुम्हारे बीच
प्यार का रूप-रंग
इतना निखर पाया |

Friday, 18 October 2013

एक टूटे हुए
खिलौनें को
जोड़ तो दिया
मजबूती से खड़ा है
उसकी मुस्कराहट में
नहीं कोई गिला है
तुम्हें शिकायत है
खिलौनें में
जोड़ क्यों दिखता है ?
आईना मत दिखाओ
न "आप" को
न "खाप" को
आईना देखते ही
एक खूंखार
और दूसरा  
आदमखोर हो जाता है |

Thursday, 17 October 2013

अभी अभी
जो आदमी यहाँ खड़ा था
चला गया केंचुल छोड़कर
इंसान वह है नहीं
सांप कहा तो डस लेगा |
बाज़ार में
तैरनें लगा है प्रश्न
यह महोदय कौन हैं ?
न जाने क्यों
सब के सब मौन हैं |
पालते हैं
फिर काटते हैं
बच्चे जान गए हैं
परवरिश किये जाने का सच
बच्चे डरे हुए हैं

Tuesday, 15 October 2013

रावण है
अपराध बोध से मुक्त
उसे मालूम है कि
उसने सीता को नहीं छुआ
राम व्यस्त हैं
सीता की
शुचिता परखने में
और हम
रामराज्य का सपना देखनें में  
बापू का नाम
किया बदनाम बापू "आसाराम"
हे राम,हे राम,हे राम | 

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बापू,
तुम वापस आये भी
तो बनकर " आसाराम"
हे राम
हे राम
हे राम 

Saturday, 12 October 2013

जब तक
राम ज़िंदा हैं
रावण भी ज़िंदा रहेगा
रावण की जान
राम की नाभि में स्थित
अमृत-कलश में,
रावण नहीं होगा तो
राम को पूछेगा कौन ?
भटक गए हैं
और जिस
रास्ते पर खड़े हैं
वह रास्ता आगे है बंद
रास्ता खुलेगा
इस इंतज़ार में
सदियों से शमशान में खड़े हैं |
सारी उम्र
तुम मुझमें ज़िंदा रहीं
हर रोज
तुम्हें नहलाता धुलाता
करीनें से संवारता
और पूरा दिन
तुम्हारे साथ गुजर जाता
रात पालने में सुला देता |
तुम्हें अपने भीतर
पालते रहने की जिम्मेदारी ने
मुझे जीना सिखा दिया |    
प्यार और सवेंदनायें
केवल शब्द
क्यों हैं स्तब्ध ?

Thursday, 10 October 2013

तुम शुरुआत
मैं अंत
तुम गुरुग्रंथ
मैं संत

Wednesday, 9 October 2013

दूसरी परम्परा की अर्थी
कब तक ढोते रहोगे
दाह-संस्कार कर दो
तीसरी परम्परा का पौधा
अपनी जड़े जमा चुका है |
राम की अयोध्या में
दीप जल रहे थे
रावण की लंका
युद्ध की त्रासद स्तिथियों
भूख ,बीमारी और
राजनैतिक सन्नाटे को
झेलती रही बरसों-बरस 
राम ने सिखाया
युद्ध लड़ो खूब लड़ो
लेकिन अपनी जन्मभूमि से दूर
उनकी धरती पर लड़ो |
महाशक्तियां
अपनी धरती पर
नहीं लड़ती युद्ध          

Monday, 7 October 2013

ऐसी कोई कविता
नहीं लिखी गयी
जो अन्याय को रोक सके
न्याय के तराजू पर
पीड़ित के साथ बैठ सके
ऐसी कोई कविता
नहीं लिखी गयी
जो न्याय की
आँखों पर बँधी पट्टी खोल सके
न लिखी गयी है और
न लिखी जायेगी
ऐसी कोई कविता
जो सताए गए
लोगों की आवाज़ बन सके |  

Sunday, 6 October 2013

ईश्वर और प्यार
कोरी बकवास |
प्यार और सवेंदनायें
केवल शब्द
क्यों स्तब्ध ?
कृत्रिम पौधे
न पैदा होते हैं
न बड़े होते हैं
इसलिए वे कभी मरते नहीं |

Saturday, 5 October 2013

औरतों की आजादी और बराबरी का विरोध करने वाले और फीमेल वर्जिनिटी को आसमान पर बैठानेवाले, मंदिर समर्थक, मोदी सपोर्टर और आरक्षण विरोधी अधिकांश ऊंची, दबंग जातियों के ही लोग हैं ,आपकी यह बात अगर मान भी ली जाए तो पूरे भारत की जनसंख्या की तुलना में ये मुट्ठीभर लोग इतने प्रभावी कैसे हो सकते हैं कि जन-सैलाब को हांक सके |
मैं तेरा नाड़ा खोलूँ
तू मेरा नाड़ा खोले
अब दो नंगों में से
जो कम नंगा लगे
उसको वे चुने
हम तो
अपना जाल बुन चुके |
इंदु प्रकाश की भविष्यवाणी और निर्मल बाबा के पाखण्ड की क्या प्रमाणिकता है ? लगभग सभी चैनलों पर भविष्यवाणी जैसे कार्यक्रम जोर शोर से दिखाए जा रहे हैं | निर्मल बाबा के पाखण्ड और भविष्यवाणी जैसे अवैज्ञानिक कार्यक्रमों का प्रचार-प्रसार तथा दूसरी ओर पाखण्ड और अवैज्ञानिक सोच की खिलाफत करने का ढोंग टी.वी चैनलों के दोहरे चरित्र को ही उजागर करता है |
माँ को भूखा सुलाता है
फिर माँ का 
जगराता करवाता है
वे
सयाने थे बहुत
जानते थे
जिस दिन जागेगा
सवालों की झड़ी लगा देगा
तर्क की कसौटी पर
कसा जाएगा उनका हर फरेब
उन्होंने अपने हर फरेब को
तर्क से परे बताया
वे सयाने थे बहुत
उन्होंने इस फरेब को
बाल-घुट्टी की तरह हमें पिलाया
और इस तरह उन्होंने
बड़ी मुश्किल से 
ईश्वर के अस्तित्व को बचाया |

Wednesday, 2 October 2013

हम एक दूसरे से
प्यार करते रहे
लेकिन एक सच
यह भी रहा कि
हमारी आँखों में प्रश्न
हमेशा तैरते रहे
मेरे और तुम्हारे बीच
एक पुल खड़ा रहा
और हम दो किनारे बने रहे |
मेरी ख्वाइश है
अपने अपने घेरों में क़ैद
एक दूसरे से जुड़े होने का
भ्रम योहीं बना रहे  | 
एक आदमी हर सुबह
हाथ में लालटेन लेकर
घर से निकलता था कुछ खोजने
दिन ढलने पर लौट आता मायूस
लोग देख रहे थे बरसों से
उसे लालटेन लेकर जाते
और मायूस होकर लौटते
सूरज की रोशनी से भी
ज्यादा भरोसा उसे लालटेन की रोशनी पर था
लालटेन की रोशनी पर
उसका भरोसा कभी टूटा नहीं
और जिसे ढूंढ रहा था वह मिला नहीं |
मरने से पहले,
दीवार पर उसने लिखा--
जिंदगी भर मैं खोजता रहा तुम्हारा ईश्वर
वह मुझे मिला नहीं
इसलिए मैं यह घोषणा करता हूँ कि
तुम्हारा  ईश्वर मर चुका है |  

Tuesday, 1 October 2013

दड़बा  खोलो
उड़ा दो सारे कबूतर
आज है दो अक्टूबर
शान्ति के सन्देश
अब और नहीं भेजे जायेंगे