Monday, 28 October 2013

राजेंद्र यादव को श्रद्धांजलि
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किसे नहीं सताया ?
सोते हुओं को
नींद से भी जगाया
और अब खुद सो गए
चिरनिद्रा में अकेले  |
अब तुम्हारे माथे पर
वे ढेरों मोर पंख जड़ेंगे
(मरने के बाद मोर पंख
जड़ने की परम्परा सभी निभाते हैं )
साहित्य के सिरमौर
साहित्य में सन्नाटा
असम्भव है क्षतिपूर्ति

और सबसे बड़ा प्रश्न होगा
"हंस" अब सफ़ेद कैसे दिखेगा ?  

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