Wednesday, 2 October 2013

एक आदमी हर सुबह
हाथ में लालटेन लेकर
घर से निकलता था कुछ खोजने
दिन ढलने पर लौट आता मायूस
लोग देख रहे थे बरसों से
उसे लालटेन लेकर जाते
और मायूस होकर लौटते
सूरज की रोशनी से भी
ज्यादा भरोसा उसे लालटेन की रोशनी पर था
लालटेन की रोशनी पर
उसका भरोसा कभी टूटा नहीं
और जिसे ढूंढ रहा था वह मिला नहीं |
मरने से पहले,
दीवार पर उसने लिखा--
जिंदगी भर मैं खोजता रहा तुम्हारा ईश्वर
वह मुझे मिला नहीं
इसलिए मैं यह घोषणा करता हूँ कि
तुम्हारा  ईश्वर मर चुका है |  

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