सारी उम्र
तुम मुझमें ज़िंदा रहीं
हर रोज
तुम्हें नहलाता धुलाता
करीनें से संवारता
और पूरा दिन
तुम्हारे साथ गुजर जाता
रात पालने में सुला देता |
तुम्हें अपने भीतर
पालते रहने की जिम्मेदारी ने
मुझे जीना सिखा दिया |
तुम मुझमें ज़िंदा रहीं
हर रोज
तुम्हें नहलाता धुलाता
करीनें से संवारता
और पूरा दिन
तुम्हारे साथ गुजर जाता
रात पालने में सुला देता |
तुम्हें अपने भीतर
पालते रहने की जिम्मेदारी ने
मुझे जीना सिखा दिया |
No comments:
Post a Comment