इतिहास
झूठी-सच्ची
यादों की गठरी है
करते रहो बलात्कार
यादों के साथ,
यादें बाँझ होती हैं
करना होगा इस सत्य को स्वीकार |
Thursday, 11 August 2016
आत्म संतुष्टि के लिए कौन लिखता है दोस्त ? अगर आत्म संतुष्टि के लिए लिखता है तो फिर छपवाने और सुनाने के लिए इतनी बेचैनी क्यों होती है रचनाकार में | एक लंबी कविता किसी आलोचक के लिए खाद्य पदार्थ हो सकती है लेकिन उसे पाठक अगर नहीं मिलते तो आत्म संतुष्टि के लिए लिखी गयी ऐसी किसी भी रचना को बैंक के लॉकर में रख देना ही श्रेयष्कर होगा |
Sunday, 7 August 2016
सच्चा बनाम लुच्चा +++++++++++++ रोको मत सपनों को आने दो बसने दो आँखों में बेख़ौफ़ | वे लौट कर नहीं आयेंगे गिर गए आँख से जो आंसूं खामोश | जो हैं सत्ता के नशे में मदहोश वे नहीं सुनेंगे तुम्हारी किसी भी बात को उन्हें जगाने के लिए तुम्हें पैदा करना होगा अपने भीतर सच्चा आक्रोश | वह आक्रोश जो बुझ जाता है मोमबत्तियां बुझ जाने के साथ मुक्ति पाना है तुम्हें उस लुच्चे आक्रोश से |