Thursday, 31 July 2014

गुम हो जाओगे
यादों के दलदल में
बाँझ होती हैं
यादें गर्भ धारण नहीं करती  |

Wednesday, 30 July 2014

बुद्धिजीविओं के पसंदीदा दो निशाने पहला नरेंद्र मोदी दूसरा इस्राइल- देश के बुद्धिजीविओं से मेरा नम्र निवेदन,कृपया निम्नलिखित दो बिन्दुओं पर मेरी जानकारी बढ़ाएं तो अति कृपा होगी=
 १) हमास अंतराष्ट्रीय आतंकवादी संघटन है या नहीं  ?
२) ISIS  प्रमुख शिया है या वहाबी | क्या आप इराक़ में ISIS  द्वारा किये जा रहे कत्लेआम का समर्थन करते हैं  

Tuesday, 29 July 2014

तुम जिसे पाप कहते हो
आदम और हव्वा ने
अगर वह पाप न किया होता
तो ईश्वर का जन्म ही नहीं हुआ होता
अपने जन्मदाता के भाग्यविधाता
तुम कब और कैसे बन गए ?
तुम्हारी जन्मकुंडली में ही लिखा था कि
तुम "धर्म" नाम का एक ज़हर
दुनियाँ में बरसाओगे और
इंसान को इंसान से लड़वाओगे   | 

Monday, 28 July 2014

दिन ने
सूरज का गला घोट दिया
और सूरज ने खून उगल दिया
साँझ के धुंधलके में
दिन के इस अपराध का
आज तक कोई गवाह नहीं मिला |

इंसान में अपराध की नीव
प्रकृति ने ही डाली है
देखिये न बड़ी मछली ने
सारी छोटी मछलियां निगल डाली हैं
सूरज चाँद को रोशन करता हैं
लेकिन अपने सामने उसे टिकने नहीं देता |
सूरज की ह्त्या में दिन और चाँद की मिलीभगत
किसी को नज़र नहीं आती है |
दिन ने
सूरज का गला घोट दिया
और सूरज ने खून उगल दिया
साँझ के धुंधलके में
दिन के इस अपराध का
आज तक कोई गवाह नहीं मिला |   

Sunday, 27 July 2014

ईराक में कत्लेआम हो रहा है 
कोई कह रहा है= 
यह नहीं हो सकता 
सुन्नियों का काम
वहाबी व्यर्थ ही 
कर रहे उन्हें बदनाम
 
सुन्नी हों या वहाबी 
वहशी दरिंदें है 
जिनका कत्लेआम हो रहा है 
वे खूबसूरत परिंदे हैं |
 
1)
छोटी सी ख्वाइश भी 
अगर पूरी नहीं हो पाती 
वक्त के साथ बड़ी हो जाती है 
और फिर उम्र भर सालती है |
2)

वे कश्मीरी पंडितों के कश्मीर से 
विस्थापित किये जाने की कथा नहीं सुनाते हैं 
और फिलीस्तीनियों का दर्द बढ़-चढ़ कर बताते हैं 
अपनों के दर्द में शामिल नहीं होते 
उनके दर्द में घड़ियाली आंसू बहाते हैं |
3)
कश्मीरी पंडितों और फिलीस्तीनियों का दर्द क्या एक जैसा नहीं है ?
4)
बुद्धिजीवी है 
कलम घिसता है और 
जमीन के नीचे अपनी ही बनाई 
अति सुरक्षित खोह में रहता है 
नपुंसक आक्रोश का जन्मदाता है |
5)
सरकार तो बाँझ होती हैं 
जनता को ही गर्भ धारण करना होता है हरबार 
पिछली बार लगे बरस दस 
तब कहीं जाकर जनता को प्रसव पीड़ा उठी 
अभी तो गर्भ ठहरा ही नहीं है इसबार |

यह तो निश्चित है कि स्त्री की सफलता के पीछे किसी पुरुष का हाथ नहीं होता है और पुरुष की सफलता वास्तव में स्त्री की ही सफलता है |
सबको अधिकार दे तो दिया है 
अपनी-अपनी भाषा में सोचने 
और अपनी भाषा में सपने देखने का 
उनका तर्क है== 
हम अगर अंग्रेजों की तरह 
सभ्य और सुसंस्कृत दिखना चाहते हैं 
उन्ही की तरह देश का शासन चलाना चाहते हैं 
तो अंग्रेजी भाषा और अंग्रेजों की पुलिस को बनाये रखना जरूरी है
मत भूलिए जिन्होंने आपको आज़ादी दिलाई 
वे सब के सब अंग्रेजी के प्रकांड पंडित थे 
अंग्रेजी को बनाये रखना
उन आज़ादी के सिपाहियों के प्रति आभार प्रगट करना है
आप मजे में
अपनी भाषा में सोचिये
और अपनी भाषा में न पूरे होने वाले सपनें देखिये |

Wednesday, 23 July 2014

बुद्धिजीवी है
कलम घिसता है और
जमीन के नीचे अपनी ही बनाई
अति सुरक्षित खोह में रहता है
नपुंसक आक्रोश का जन्मदाता है  |

Tuesday, 22 July 2014

सरकार  तो बाँझ होती हैं
जनता को ही गर्भ धारण करना होता है हरबार
पिछली बार लगे बरस दस
तब कहीं जाकर जनता को प्रसव पीड़ा उठी
अभी तो गर्भ ठहरा ही नहीं है इसबार |
उम्मीद उड़ न जाए
पिंजरे में कैद कर रक्खी है
उनसे मेरी पटती नहीं है
लेकिन दोस्ती बड़ी पक्की है |
नरेश सक्सेना की कविता "रंग" पर एक प्रतिक्रिया
==============================
कविता को भी
धर्म की चौखट पर
माथा रगड़ना सिखा दिया
आकाश को हिन्दू और
धरती को मुसलमान बना दिया |
हवा ही धर्मविहीन क्यों रहे
कृपया हवा को ईसाई कहें  |

Sunday, 20 July 2014

खुद बेईमान
बुरके से बचाते हैं
अपना ईमान
लार टपकती है
सुनकर अज़ान
वाह रे मुसलमान  |

2)
हरि भजन गाते है
मंदिर की घंटियाँ सुनकर
लार टपकाते हैं
धर्म धर्म चिल्लाते हैं
वाह भाई मेरे हिन्दू  |
छोटी मछली 
बड़ी मछली का है शिकार  |
प्रकृति का नियम है 
कृपया हस्तक्षेप न करें 
कमजोर हैं तो ईश्वर से डरें  | 
जम गई है बर्फ
पिघलने दो
फासले मत बढ़ने दो |
थक गया है
रुकने को मत कहो
उसे चलने दो  |
वक्त फिर लौटकर आता नहीं है
अभी वह हँस रहा है
उसे हँसने दो  |
दोगले हैं
खोखले हैं हम सब
कोई एक भी न मिला
जिसके लार न टपकती हो
वह चैन से सोया पड़ा था
न उसके लार टपक रही थी
और न ही उसकी श्वांस चल रही थी  
दोस्तों,घंटी कहीं दूर बजती है
लार हमारी क्यों टपकती है  ?

Saturday, 19 July 2014

कहने और होने के बीच का फर्क
आपको नहीं दिखना चाहिए
इस बारे में वे एकमत हैं  |
जमता पानी है
कहते हैं बर्फ जम गयी
पिसता गेहूँ है
कहते हैं आटा पिस गया
एक सोची-समझी योजना के अनुसार
वे गिरते हैं जान-बूझकर
और कहते हैं पैर फिसल गया  |

Friday, 18 July 2014

प्यार से नहीं
अनजाने डर से पैदा होती है आस्था
सत्य कैद में है और  
ईश्वर का नाम लेते ही
उपस्थित हो जाते हैं ईश्वर के दलाल  |
उन्होंने कहा था
आप नहीं माने
बलात्कार को
अपराध की श्रेणी से
बाहर कर दिया होता
अपराध कम हो जाते  | 
तुम हो गए
कुछ और तीखे
इस तरह से
वार करना कहाँ सीखे ?

तुम्हें जब-जब
पहुँचाई चोट अपनों ने
तुम न रोये और न चीखे  |

Thursday, 17 July 2014

बच्चे ने पूछा-
माँ सपने कैसे होते है ?
माँ ने कहा-
बेटा सपनों की फसल अब नहीं होती |

Wednesday, 16 July 2014

कौन था
ईश्वर की अवधारणा का जनक  ?
किसने की
हमारे कर्मों का लेखा-जोखा रखने की व्यवस्था ?
सृष्टि के प्रारम्भ से पहले जब कर्म नदारद थे
नियति के निर्धारण का आधार क्या था  ?
वे कहते हैं ये सवाल अब बेमानी हैं
बस इतना जानिये कि
चाँद,तारे, हवा और पानी
सब उसकी मेहरबानी है  | 

Monday, 14 July 2014

काश ! ईश्वर से एक-बार मुलाक़ात हो जाती तो उनसे अल्लाह का हालचाल पूछता और इस बहाने गॉड से भी मिलना हो जाता | सुना है ये सब पड़ोसी हैं,इमारत के एक ही ब्लॉक में रहते हैं और सबसे बड़ी खूबी इनकी यह है कि ये कभी लड़ते नहीं ?   
बच्चों को
उनके बचपन में जाकर
देखने का बार-बार मन होता है
इस मुलाक़ात के कई फायदे हैं
बच्चों को उग आई सींग लुप्त हो जाती है
आप एक बार फिर
जवान हो जाते हैं और
बच्चों की ऊँगली पकड़कर
उन्हें चलना सिखाने का आनंद उठाते हैं
आइये चलें
बच्चों से उनके बचपन में जाकर मिलें   | 

Sunday, 13 July 2014

सन्दर्भ-  इस्रायल और फिलिस्तीन
=======================
दोनों अड़े हैं
इसीलिए बरसों पहले
जहाँ थे वहीँ खड़े हैं  |
मेमने की नज़र से ही
दुनियाँ को देखते रहना
और शेर को कातिल समझना,
क्या यह न्याय है ?  

Wednesday, 9 July 2014

सर्वव्यापी ,
दिखते नहीं हैं
लेकिन चुभते बहुत हैं
नामकरण की सुविधा
है उपलब्ध आपको  |

1)
उफनती हुई लहरों को देखो 
ऐसा लगता है 
समुन्दर कभी बूढ़ा नहीं होता |

2)
भूख उसके चेहरे पर पसरी हुई थी 
बच्चा रोटी के लिए रो रहा था 
उसका पिता उसे समझा रहा था 
मत रो बेटा रोटी बुलेट ट्रेन से आ रही है 
हालांकि बुलेट ट्रेन की स्पीड बहुत अधिक है 
फिर भी कुछ देर तो लगेगी 
क्योकि रोटी और तुम्हारे बीच की दूरी बहुत ज्यादा है |
3)
अपने विश्वासों पर 
तुम विश्वास करते रहना 
जिंदगी भर कूप मंडूक बनकर रहना |
क्यों नहीं खोलते खिड़कियाँ
कुछ तो मजा लो 
ताज़ी हवा में सांस लेने का |
4)
जिसके घुंघराले बालों की
तारीफ़ करते हुए हम नहीं अघाते थे
वह विग लगाकर चलता था
वास्तव में वह गंजा था |
कड़ी धूप में हमें छाया देगा
जिसे हम छतरी समझते थे
वास्तव में
वह गिद्ध का निर्मम पंजा था |
मुक्ति चाहते है
लेकिन एक जाल से निकलकर
दूसरे जाल में फंस जाते हैं
चूहों को उन्होनें सिखा दिया है
जाल बुनने का हुनर
चूहे जाल बुनते हैं और फिर खुद फंसते हैं
कहने को शेर हैं
लेकिन नियति हमारी क़ैद है   | 

Friday, 4 July 2014

जिनका मन नहीं चंगा
उनकी कठौती में
नहीं समाती है गंगा
मंदिर,मस्जिद, गुरद्वारा
भीख मांगने जाते हो
अपना जिस्म लेकर नंगा  |
मंदिर,मस्जिद, गुरद्वारे
के बाहर
मैले कुचैले कपड़ों में बैठे
व्यक्ति को
कहते हो तुम भिखमंगा |      

Thursday, 3 July 2014

खाई को पाटना नामुमकिन है
एकमात्र विकल्प पुल है |
पुल बन जाने से भी
दूरियां मिटती नहीं
हाँ, दूरियां अब आपको दिखती नहीं   | 
तुम्हारी ऊँगली पकड़कर
तुम्हें चलना सिखाते-सिखाते
वह चलना भूल गया
तुम्हें चलना आया
तुमनें हाथ छुड़ाया
तेज-तेज कदमो से तुम भागे
पहाड़ पर चढ़ते तुम्हें देखते रहे
तुम्हारे पिता अभागे
गिरना मत,तुम्हें है आगे बढ़ना
पीछे मुड़कर मत कभी देखना  |

Wednesday, 2 July 2014

कहानी लिख न सका
अब वह
उपन्यास लिखने की सोच रहा है
एक लंगड़ा
पहाड़ पर चढ़ने का स्वप्न देख रहा है  |