Sunday, 27 July 2014

1)
छोटी सी ख्वाइश भी 
अगर पूरी नहीं हो पाती 
वक्त के साथ बड़ी हो जाती है 
और फिर उम्र भर सालती है |
2)

वे कश्मीरी पंडितों के कश्मीर से 
विस्थापित किये जाने की कथा नहीं सुनाते हैं 
और फिलीस्तीनियों का दर्द बढ़-चढ़ कर बताते हैं 
अपनों के दर्द में शामिल नहीं होते 
उनके दर्द में घड़ियाली आंसू बहाते हैं |
3)
कश्मीरी पंडितों और फिलीस्तीनियों का दर्द क्या एक जैसा नहीं है ?
4)
बुद्धिजीवी है 
कलम घिसता है और 
जमीन के नीचे अपनी ही बनाई 
अति सुरक्षित खोह में रहता है 
नपुंसक आक्रोश का जन्मदाता है |
5)
सरकार तो बाँझ होती हैं 
जनता को ही गर्भ धारण करना होता है हरबार 
पिछली बार लगे बरस दस 
तब कहीं जाकर जनता को प्रसव पीड़ा उठी 
अभी तो गर्भ ठहरा ही नहीं है इसबार |

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