नरेश सक्सेना की कविता "रंग" पर एक प्रतिक्रिया
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कविता को भी
धर्म की चौखट पर
माथा रगड़ना सिखा दिया
आकाश को हिन्दू और
धरती को मुसलमान बना दिया |
हवा ही धर्मविहीन क्यों रहे
कृपया हवा को ईसाई कहें |
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कविता को भी
धर्म की चौखट पर
माथा रगड़ना सिखा दिया
आकाश को हिन्दू और
धरती को मुसलमान बना दिया |
हवा ही धर्मविहीन क्यों रहे
कृपया हवा को ईसाई कहें |
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