दिन ने
सूरज का गला घोट दिया
और सूरज ने खून उगल दिया
साँझ के धुंधलके में
दिन के इस अपराध का
आज तक कोई गवाह नहीं मिला |
इंसान में अपराध की नीव
प्रकृति ने ही डाली है
देखिये न बड़ी मछली ने
सारी छोटी मछलियां निगल डाली हैं
सूरज चाँद को रोशन करता हैं
लेकिन अपने सामने उसे टिकने नहीं देता |
सूरज की ह्त्या में दिन और चाँद की मिलीभगत
किसी को नज़र नहीं आती है |
सूरज का गला घोट दिया
और सूरज ने खून उगल दिया
साँझ के धुंधलके में
दिन के इस अपराध का
आज तक कोई गवाह नहीं मिला |
इंसान में अपराध की नीव
प्रकृति ने ही डाली है
देखिये न बड़ी मछली ने
सारी छोटी मछलियां निगल डाली हैं
सूरज चाँद को रोशन करता हैं
लेकिन अपने सामने उसे टिकने नहीं देता |
सूरज की ह्त्या में दिन और चाँद की मिलीभगत
किसी को नज़र नहीं आती है |
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