सरकार तो बाँझ होती हैं
जनता को ही गर्भ धारण करना होता है हरबार
पिछली बार लगे बरस दस
तब कहीं जाकर जनता को प्रसव पीड़ा उठी
अभी तो गर्भ ठहरा ही नहीं है इसबार |
जनता को ही गर्भ धारण करना होता है हरबार
पिछली बार लगे बरस दस
तब कहीं जाकर जनता को प्रसव पीड़ा उठी
अभी तो गर्भ ठहरा ही नहीं है इसबार |
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