आपका समर्थन करने वालों में ,आपके साथ खड़े होने वालों में हमेशा पुरुषों की संख्या ही ज्यादा देखनें को मिली है | क्या इन पुरुषों के द्वारा आपको दिए समर्थन में कोई दुराग्रह दिखता है ? मर्द जिस भाषा में आपस में बात करते हैं ,उस भाषा में स्त्रियों से बातें नहीं करते | मर्द और स्त्री होनें का बोध ,क्या कभी इस बोध के मिटनें की सम्भावना है ? जब तक यह स्त्री और पुरुष होने का बोध है , दोगलापन इसी बोध का पर्यायवाची है |
अगर स्त्रियाँ ही हैं जिन्होंने पुरुष प्रजाति को इंसान बना रखा है तो यह जानवर किस ग्रह से आते हैं मित्र ?
इंसानों को स्त्री और पुरुष में बांटकर ,स्त्रियों के साथ अन्याय करनें में पुरुषों को सुविधा होती है |
कुछ पुरुषों की कमजोरी होती है कि वे पुरुष प्रधान बरसों पुरानी व्यवस्था की खिलाफत नहीं कर पाते हैं और कुछ लोग इसकी खिलाफत मात्र इसलिए करते हैं ताकि रायशुमारी के समय उनका नाम प्रगतिशीलों में लिखा जा सके | महिलाएँ इस बारे में क्या सोचती हैं ?पुरूषों को अपनी राय देने का कोई निषेध नहीं है|