स्त्री आमंत्रण दे और पुरुष अस्वीकार कर दे ,ऐसे वीर बालक क्या कहीं हैं ? और ऐसी स्त्री का सानिध्य जो आपको बरसों से अपना मित्र मानती हो ,ऐसी स्त्री का आमंत्रण आप कैसे अस्वीकार कर सकते हैं लेकिन वही स्त्री जब इसे बलात्कार कहती है तो त्रियाचरित्र का मतलब समझ में आ जाता है और जब आपके अधिकाँश मित्र एवं सहयोगी उस महिला के झूठ में उसके साथ खड़े हुए दिखाई देते हैं तो आत्महत्या करने के अतिरिक्त कुछ बचता है क्या ?
खुर्शीद भाई तुम्हें सच को स्वीकार कर लेना था,उनका झूठ स्वतः बेपर्दा हो जाता |
खुर्शीद भाई तुम्हें सच को स्वीकार कर लेना था,उनका झूठ स्वतः बेपर्दा हो जाता |
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