Saturday, 28 June 2014

गलत हो या सही
हर हाल में
तुम्हारा पक्ष लेना मेरी मजबूरी है
क्योकि मेरे और तुम्हारे बीच
मीलों की दूरी है  |
मुट्ठी बांधकर आता है
खुली हथेली जाता है
क्षण भर में
रच जाता है इतिहास
भूगोल बदल जाता है  |
चीखने पर भी नहीं सुनते
बिन कहे जो समझ जाएँ
ऐसे लोग अब कहाँ  ?

Wednesday, 25 June 2014

पिता की ऊँगली पकड़कर
सीखा है चलना
जब तक हम बेटे थे
इस सत्य को नहीं मानते थे
आज मानते हैं
क्योकि पिता होने के अहंकार से भरे हैं | 
उभर आई है 
हथेलियों पर चीख 
जिसकी हथेली पर उभरती है 
चीख केवल उसी को दिखती है |

2)
एक जिज्ञासा है= सकारात्मक सोच वाले किसी व्यक्ति, जिसनें अदृश्य को देख लिया हो ,अमूर्त को महसूस कर लिया हो और असंभव को पा लिया हो,से क्या मुलाक़ात संभव हो सकी है ?

3)
यह बच्चा नहीं जानता होगा
मज़हब का मतलब
इसे जगाओ और 
मज़हब का मतलब तो समझाओ 
जिसकी हथेली पर उभरती है 
चीख केवल उसी को दिखती है |
बच्चे नहीं जानते मज़हब का मतलब
यही तो है उनके चेहरों पर रोशनी का सबब 
तुम मज़हब का मतलब 
उन्हें क्योंकर समझाते हो ?
बेवजह हिन्दू ,मुसलमान बनाते हो |

Monday, 23 June 2014

भेड़िया
कहीं से आता नहीं है
हमेशा हमारे पास
हमारे साथ ही रहता है
जब-जब उसकी भूख जागती है
हमारी आत्मा को लहूलुहान कर
हमारे बीच चुपचाप आकर सो जाता है | 

Sunday, 22 June 2014

एक दूसरे के चेहरे
नाखूनों से खरोंचकर बिगाड़ते हैं
और फिर उम्रभर
एक दूसरे के चेहरे को संवारते हैं
गृहस्थ जीवन में
शायद इसी को प्यार कहते  हैं |   
हज़ारों लाखों पेड़ों में
अगर कोई पेड़ सोचता है
जंगल नाराज़ नहीं होता
जंगल को मालूम है कि
जो पेड़ सोचता है
वह कायर हो जाता है
ज़मीन के नीचे अपनी ही बनाई
अति सुरक्षित खोह में रहता है
और किसी भी युद्ध से डरता हैं======| 
एक दीवार थी
जो रोकती थी
एक ऊँगली थी
जो टोकती थी
दीवार मैंने लांघ ली है 
ऊँगली मैंने तोड़ दी है |


कोशिश बहुत की
न दीवार टूटी
न ऊँगली
धन दौलत
इज़्ज़त शोहरत
सब मुझसे रूठी
शास्त्रों को
क्यों शस्त्र बना लेते हैं लोग  ?

2)
बुद्धिजीवी कायर विरोध करते हैं
वे निर्विघ्न
कत्ले-आम करते हैं |
शायराना विरोध से
कत्ल का यह सिलसिला थमेगा नहीं |
3)
हमारी सोच से हमारे स्वास्थ की जानकारी भी मिलती है , हमारी सोच में हमेशा शामिल होता है हमारा स्वास्थ |
4)
अंग्रेजी को लेकर तो कोई विवाद नहीं हैं न, सविंधान में संशोधन करके अंग्रेजी को राष्ट्रभाषा घोषित कर दिया जाना चाहिए | न रहेगा बांस न बजेगी बांसुरी ,हिंदी को देश निकाला, आला रे आला |
यह कैसी राष्ट्रभाषा है ? जब जब हिंदी में काम करने की बात होती है विरोध शुरू हो जाता है संविधान में संशोधन करिये ,अंग्रेजी को राष्ट्रभाषा घोषित करिये और व्यर्थ के इस विरोध से बचिये | मेरे इस विनम्र निवेदन में आप हमारे साथ तो हैं न ?
5)
अगर आप दूसरों की प्रशंसा करना नहीं जानते तो निश्चित जानिये कि जिंदगी के रास्तों में आप अनचाहे ही कांटें उगा रहे हैं, ये दिखेंगे नहीं लेकिन चुभेंगे बहुत |
एक का मंत्र
दूसरे के लिए गाली है
कहते हैं
साली आधी घरवाली है |

Friday, 20 June 2014

शवों की आलोचना नहीं होती |====१)

हर शिला के पास रुकुंगा मैं
अवांछित ही सही |=============२)

बैसाखियों के सहारे
चलना सीखा भी तो क्या सीखा ?=====३)

अगर आप दूसरों की प्रशंसा करना नहीं जानते तो निश्चित जानिये कि जिंदगी के रास्तों में आप अनचाहे ही कांटें उगा रहे हैं, ये दिखेंगे नहीं लेकिन चुभेंगे बहुत |======४)

यह कैसी राष्ट्रभाषा है ? जब जब हिंदी में काम करने की बात होती है विरोध शुरू हो जाता है संविधान में संशोधन करिये ,अंग्रेजी को राष्ट्रभाषा घोषित करिये और व्यर्थ के इस विरोध से बचिये | मेरे इस विनम्र निवेदन में आप हमारे साथ तो हैं न ?=====५)

Monday, 16 June 2014

जब उन्हें
गिरगिट कहा जाता है
वे शर्माते नहीं
केवल अपना रंग बदल लेते हैं
राष्ट्रीय सम्मान की तालिका में
उनका नाम सबसे पहले आता है
जिन्हें रंग बदलने का हुनर आता है | 

Sunday, 15 June 2014

सुनो पहाड़ 
पत्थर ही बने रहो 
वे देवता बनाकर 
एक न एक दिन 
तुम्हे मंदिर में बिठा देंगे |
जब हम बच्चे थे 
तब सोचते थे कब बड़े होंगे 
कब अपने पैरों पर खड़े होंगे 
हम अपने पावँ पर तो खड़े हो गए 
लेकिन क्या हम बड़े हो गये ?
जब भी सरकार 
कड़े फैसले लेने की बात करती है 
गाज हमेशा ही 
आम आदमी पर गिरती है |
पहले फुसलाते हो 
फिर अर्थव्यवस्था की 
खस्ताहाल स्थिति बताकर डराते हो 
अब हम जानते हैं 
सरकार द्वारा जब भी 
कड़े फैसले लिए जाते हैं 
वे सभी फैसले 
पूंजीपतियों के पक्ष में जाते हैं |
1)
बच्चों द्वारा
पिता का भरपूर शोषण किया जाता है
आश्चर्यजनक है किन्तु सत्य है
पिता इस शोषण का कभी विरोध नहीं करता
और खुद को
शोषित कहा जाना भी पसंद नहीं करता  |

2)
" पिता का भरपूर शोषण किया मैंने" === यह मेरा कबूलनामा है , कुछ बरस बाद यह मेरे बच्चों का कबूलनामा होगा |

अवधेश निगम

3)
पिता बनने के बाद 
पिता की याद बहुत आती है 
बच्चों की फिक्र में 
उनका रात-रात भर जागना 
बैठे-बैठे ही अपना क़द नापना 
बच्चों का क़द 
जब अपने क़द से बड़ा पाता है 
तो पिता ही है जो जश्न मनाता है |

फादर्स डे पर पिता को याद करते हुए|||||||||||||||||||||||||||||