Friday, 30 November 2012

प्यार क्या है ?
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प्यार करना
बिस्तर पर
आसान है बहुत
आसान नहीं है
कहना-- प्यार |


यह कैसी विडम्बना है ?
जिससे आप
कह पाते हैं  --प्यार ,
कर नहीं पाते
उसे बिस्तर पर- प्यार |

Thursday, 29 November 2012

भाषा प्रेम की
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आदि काल से
प्रेम की एक ही भाषा है
किसी को सशरीर
पाने की लालसा है |

किस नई भाषा की
बात करते हो मेरे दोस्त
प्रेम की भाषा से तुम
कभी अलग नहीं कर पाए गोश्त
ठीक है न मेरे दोस्त |
बच्चे नहीं हैं ये ---
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इश्क की बातें करो
तो चवन्नी छाप लेंगे
बगावत की बातें करो
तो कन्नी काट लेंगे

कौन कहता है कि बच्चे हैं
आता नहीं है इश्क करना
जरूरत हो तो छन्नी से
 पानी छान लेंगे
बगावत की बातें करो
तो कन्नी काट लेंगे
इश्क में ---
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तमाम रात
जागने के बाद
इश्क हो गया काफूर
चले थे जानने
इश्क का पता
लापता खुद हो गये |

वक़्त ने बिसरा दिया
वह, कोई अपना ही था
गुजर कर भी
जो नहीं गुजरता
वह एक घाव है
जो आज भी है रिसता |
ख्वाइश----
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 नहीं चाहिए पंख
ऊँची उड़ान
भरने का सामर्थ्य
नहीं चाहिए |

आदिम स्वप्नों से
मुक्त होना चाहता हूँ
प्रेम भरा ह्रदय
नहीं चाहिए |


हाँ ,
समेट लेना चाहता हूँ
सारी सुन्दरता
अपनी बाँहों में एक साथ |

Tuesday, 20 November 2012

.बहुत से सन्देश आ रहे हैं की बालासाहेब ठाकरे की लम्बी उम्र के लिए प्रार्थना करें | इस बाबत मेरा कहना है कि=========

हमारे बस में अगर होता
तो चन्द्र शेखर आज़ाद
भगत सिंह और
सुभाष चन्द्र बोस को
क्योंकर मरने दिया होता |
हमारे पास बूढ़े
और असहाय लोगो की
एक लम्बी कतार होती
और माँ भारती
हमारे साथ उनको भी ढोती |
वे बेचारे
+++++++++++++
वे कहते हैं कि
वे गद्दार नहीं हैं
वे सिर्फ
गद्दी के यार हैं |
बेचारे हैं 
वे करते हैं गद्दारी
इसी यारी के लिए |
तुम हो की
निरर्थक उन्हें गाली देते हो |

Saturday, 17 November 2012

बच्चे घर में
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बच्चे
मेहमान बनकर आएँ
तो अच्छे |
मेहमान पसर जाए
घर में
तो रुलाए |

बेटियाँ हमेशा
मेहमान बनकर आती हैं
हम सभी को
सुहाती हैं |

बेटी भी
अगर मेहमान बनकर आए
और आपके घर में
सपरिवार पसर जाए
तो वो
कभी न भाए  |

बच्चे
अगर मेहमान बनकर आएँ
तो अच्छे |

Wednesday, 14 November 2012

बच्चे जब ----
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बच्चे जब
बाप बन जातें हैं
 पथरा जाते हैं उनके पिता |

 इंसान चाहे कितना भी  बड़ा हो जाये
रहता हमेशा अपने माता-पिता का बच्चा ही है|
यह बात कहने में
बहुत आसान है लेकिन
उतनी सरल भी नहीं |

कोई भी व्यक्ति
एक ही समय में
किसी का बच्चा
और किसी का पिता
नहीं हो सकता |

इसीलिए वह
अपने भीतर के बच्चे को
मार देता है और
दे देता है पिता को मृत्यदंड |

उसे दोषी मत ठहराव
वह पिता बन सके
इसके लिए यह जरूरी है |

Saturday, 10 November 2012

मर्यादा पुरषोत्तम
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दीपावली
तथाकथित मर्यादा पुरषोत्तम राम
की रावण पर विजय तथा
अग्नि देव द्वारा
सीता की शुचिता की घोषणा
का पर्व है |


इस देश को इसीलिए
मर्यादा पुरषोत्तम राम 
पर गर्व है |

Thursday, 8 November 2012

शुभ दीपावली
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सोचता हूँ
दीवाली पर शुभकामनाएं देने की
औपचारिकता निभा ही दूँ |
दीप जलाऊं या न जलाऊं
अँधेरा भाग जाये
आपके जीवन से
इसका ढोंग तो रचाऊं |

उसके आँगन में
मेरे आँगन से
रोशनी ज्यादा हो
किसी ने कभी भी
यह ख्वाइश नहीं की
दमक जाते सबके आँगन |

उसके सामानों की फेहरिस्त
मेरे सामानों की
फेहरिस्त से
लम्बी न होने पाए
दोस्त है वो तो क्या ?
चैन की नींद
वो सोने न पाए |

शुभकामनाएं
देते रहे
एक दूसरे को
और डरते रहे कि
शुभकामनाएं
कहीं फलीभूत न हो जायें |
क्या बताऊँ
शुभकामनाएं देना
एक औपचारिकता है
इसीलिए आदमी
जन्मदिन हो
या हो कोई पर्व
इसे निभाता है |    
शुभ दीपावली
==============
सोचता हूँ
दीवाली पर शुभकामनाएं देने की
औपचारिकता निभा ही दूँ |
दीप जलाऊं या न जलाऊं
अँधेरा भाग जाये
आपके जीवन से
इसका ढोंग तो रचाऊं |

उसके आँगन में
मेरे आँगन से
रोशनी ज्यादा हो
किसी ने कभी भी
यह ख्वाइश नहीं की
दमक जाते सबके आँगन |

Wednesday, 7 November 2012

पेड़ों के साथ
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पेड़ों के पास बैठना
लिपट जाना
रोना ,सहलाना
नोचना ,खसोटना
सब कितना आसान है पेड़ों के साथ ।

निरापद है
पेड़ों से बातचीत करना ।

कितना आसान है
पेड़ों से यह कहना कि
हम तुमसे नफरत करते हैं
कुछ भी कहना कितना आसान है
पेड़ों के साथ ।

किसी के हिस्से का जहर
कोई यों ही नहीं पीता
कितना आसान है यह मान लेना
कि पेड़ हमसे प्यार करते हैं
कुछ भी मान लेना
कितना आसान है ,पेड़ों के साथ ।

आसान नहीं है
पेड़ों के साथ "घर" बसाना
हम पेड़ों के साथ सो नहीं सकते
और पेड़
कर नहीं सकते प्यार ,बिस्तर पर । 
पेड़ों के साथ
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पेड़ों के पास बैठना
लिपट जाना
रोना, सहलाना
नोचना ,खसोटना
सब कितना आसान है पेड़ों के साथ ।

निरापद है
पेड़ों से बातचीत करना ।
कितना आसान है
पेड़ों से यह कहना कि
हम तुमसे नफरत करते हैं
कुछ भी कहना कितना आसान है
पेड़ों के साथ ।

किसी के हिस्से का जहर कोई
यो ही  नहीं पीता
कितना आसान है यह मान लेना
कि पेड़ हमसे प्यार करते हैं
कुछ भी मान लेना
कितना आसान है, पेड़ों के साथ ।

आसान नहीं है
पेड़ों के साथ "घर " बसाना
हम पेड़ों के साथ सो नहीं सकते
और पेड़
कर नहीं सकते प्यार बिस्तर पर । 

Monday, 5 November 2012

स्त्री विमर्श
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मत खीचो
लक्ष्मण रेखा
जीनो दो उन्हें भी पुरुष की तरह---बेहया
बगैर किसी रेखा में बंधें हुए |
इसमें मात्र एक अड़चन हैं
उनका गर्भाशय
तुम समझ गए न मेरा आशय |



कुमार अवधेश

Sunday, 4 November 2012

हमारी आदत है
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हमारी आदत है
हम मिटा देते हैं
अपनी पहचान के सारे स्रोत |
और कोई अगर
करना चाहता है हमारी शिनाख्त
हम मान लेते हैं
उसे अपना दुश्मन |
क्यों ऐसा होता है
बता मेरे मन ?
मुझे भाषा चाहिए
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तुमने कहा -मौन
और मैं
कुछ, बहुत कुछ
कहते कहते मौन हो गया
वह सब अनकहा एक सागर
मेरे भीतर रोता है
मौन थक कर
अनाभिव्यक्त सो जाता है |
मौन मुझको तुम तक
संप्रेषित नहीं कर पा रहा है
मुझे भाषा चाहिए | 

Thursday, 1 November 2012

व्याकरण सम्बन्धों का
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बच्ची सोच रही है
 दुनिया कितनी सुन्दर है
पापा ,मम्मी ,भाई, बहन के साथ
हलाकि वोह गलत सोच रही है |
बड़े हमेशा से यही मानतें हैं कि
बच्चे गलत सोचतें हैं |
लेकिन इस बार
सच में,वोह गलत सोच रही है
उसे मालूम नहीं है कि
सारे सम्बन्धों को वक्त -वक्त पर
तौलना पड़ता है
हर बार
तराजू बदलने के साथ ही
बदल जाता है
सम्बन्धों का वजन 
वक्त के साथ
हर सम्बन्ध का वजूद
खो जाता है |
यहाँ सब कुछ
एक प्रायोजित कार्यक्रम
की तरह घटित होता है
फिर तू क्योंकर रोता है |
गुनाहगार हो तुम
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औरत को
दूसरे दर्जे का नागरिक बना कर
सजा दिया कमरे में
अपने ही देश में
देश निकाले की सजा देकर
तुमने किया है गुनाह
जिसकी कोई मुआफी नहीं
और देश के सविंधान में
तुम्हारे इस गुनाह की
कोई सजा भी नहीं
यह कैसा देश है ?
जहाँ शक्ति की देवी
माँ काली ,माँ भगवती
माँ दुर्गा को
मंदिरों में स्थापित कर
औरत के प्रति 
अपनी आस्था की इतिश्री