Thursday, 1 November 2012

व्याकरण सम्बन्धों का
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बच्ची सोच रही है
 दुनिया कितनी सुन्दर है
पापा ,मम्मी ,भाई, बहन के साथ
हलाकि वोह गलत सोच रही है |
बड़े हमेशा से यही मानतें हैं कि
बच्चे गलत सोचतें हैं |
लेकिन इस बार
सच में,वोह गलत सोच रही है
उसे मालूम नहीं है कि
सारे सम्बन्धों को वक्त -वक्त पर
तौलना पड़ता है
हर बार
तराजू बदलने के साथ ही
बदल जाता है
सम्बन्धों का वजन 
वक्त के साथ
हर सम्बन्ध का वजूद
खो जाता है |
यहाँ सब कुछ
एक प्रायोजित कार्यक्रम
की तरह घटित होता है
फिर तू क्योंकर रोता है |

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