Thursday, 8 November 2012

शुभ दीपावली
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सोचता हूँ
दीवाली पर शुभकामनाएं देने की
औपचारिकता निभा ही दूँ |
दीप जलाऊं या न जलाऊं
अँधेरा भाग जाये
आपके जीवन से
इसका ढोंग तो रचाऊं |

उसके आँगन में
मेरे आँगन से
रोशनी ज्यादा हो
किसी ने कभी भी
यह ख्वाइश नहीं की
दमक जाते सबके आँगन |

उसके सामानों की फेहरिस्त
मेरे सामानों की
फेहरिस्त से
लम्बी न होने पाए
दोस्त है वो तो क्या ?
चैन की नींद
वो सोने न पाए |

शुभकामनाएं
देते रहे
एक दूसरे को
और डरते रहे कि
शुभकामनाएं
कहीं फलीभूत न हो जायें |
क्या बताऊँ
शुभकामनाएं देना
एक औपचारिकता है
इसीलिए आदमी
जन्मदिन हो
या हो कोई पर्व
इसे निभाता है |    

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