इश्क में ---
===========
तमाम रात
जागने के बाद
इश्क हो गया काफूर
चले थे जानने
इश्क का पता
लापता खुद हो गये |
वक़्त ने बिसरा दिया
वह, कोई अपना ही था
गुजर कर भी
जो नहीं गुजरता
वह एक घाव है
जो आज भी है रिसता |
===========
तमाम रात
जागने के बाद
इश्क हो गया काफूर
चले थे जानने
इश्क का पता
लापता खुद हो गये |
वक़्त ने बिसरा दिया
वह, कोई अपना ही था
गुजर कर भी
जो नहीं गुजरता
वह एक घाव है
जो आज भी है रिसता |
No comments:
Post a Comment