Friday, 20 June 2014

शवों की आलोचना नहीं होती |====१)

हर शिला के पास रुकुंगा मैं
अवांछित ही सही |=============२)

बैसाखियों के सहारे
चलना सीखा भी तो क्या सीखा ?=====३)

अगर आप दूसरों की प्रशंसा करना नहीं जानते तो निश्चित जानिये कि जिंदगी के रास्तों में आप अनचाहे ही कांटें उगा रहे हैं, ये दिखेंगे नहीं लेकिन चुभेंगे बहुत |======४)

यह कैसी राष्ट्रभाषा है ? जब जब हिंदी में काम करने की बात होती है विरोध शुरू हो जाता है संविधान में संशोधन करिये ,अंग्रेजी को राष्ट्रभाषा घोषित करिये और व्यर्थ के इस विरोध से बचिये | मेरे इस विनम्र निवेदन में आप हमारे साथ तो हैं न ?=====५)

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