सन्दर्भ- इस्रायल और फिलिस्तीन
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दोनों अड़े हैं
इसीलिए बरसों पहले
जहाँ थे वहीँ खड़े हैं |
मेमने की नज़र से ही
दुनियाँ को देखते रहना
और शेर को कातिल समझना,
क्या यह न्याय है ?
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दोनों अड़े हैं
इसीलिए बरसों पहले
जहाँ थे वहीँ खड़े हैं |
मेमने की नज़र से ही
दुनियाँ को देखते रहना
और शेर को कातिल समझना,
क्या यह न्याय है ?
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