हम हमेशा खुद को मदारी की भूमिका में देखना चाहते हैं जबकि हम जिंदगी भर बन्दर की भूमिका निभाने के लिए अभिशप्त हैं |
बंजर खेतों में
पेड़ की छाया ढूंढते हो
नासमझ हो,
समुन्दर में किनारा ढूंढते हो |
ईश्वर अगर होता तो रस्सियों से बंधे उस बेबस पिता जिसकी 13 साल की बेटी को रोंदा जा रहा था,की फ़रियाद जरूर सुनता |
दोस्ती में बंधे रहने की विवशता नहीं होती,जहाँ बंधे रहने की विवशता होती है वहां दोस्ती नहीं होती |
तुम हमारे मन की बात नहीं सुनते
हम तुम्हारे "मन की बात" क्यों सुने ?
बंजर खेतों में
पेड़ की छाया ढूंढते हो
नासमझ हो,
समुन्दर में किनारा ढूंढते हो |
ईश्वर अगर होता तो रस्सियों से बंधे उस बेबस पिता जिसकी 13 साल की बेटी को रोंदा जा रहा था,की फ़रियाद जरूर सुनता |
दोस्ती में बंधे रहने की विवशता नहीं होती,जहाँ बंधे रहने की विवशता होती है वहां दोस्ती नहीं होती |
तुम हमारे मन की बात नहीं सुनते
हम तुम्हारे "मन की बात" क्यों सुने ?
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