सच दफ़्न नहीं होता
=============
सच को
उगल दिया होता
तो कोई गड़बड़ नहीं होती
तुम निगल गए सच और
झूठ की करते रहे उलटी |
कभी सोचा ही नहीं
जिंदगी की गाड़ी
चलने से पहले क्यों पलटी ?
सच को उगलते
सच से आँखें मिलाते
तुम जीत जाते |
तुम सच को दफनाने की
करते रहे जुगत
सच को लील गए
झूठ को उगल दिया
सच दफनाने से रह गया
अब तो कब्रिस्तान में
उसके लिए बची नहीं है
कोई जगह |
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सच को
उगल दिया होता
तो कोई गड़बड़ नहीं होती
तुम निगल गए सच और
झूठ की करते रहे उलटी |
कभी सोचा ही नहीं
जिंदगी की गाड़ी
चलने से पहले क्यों पलटी ?
सच को उगलते
सच से आँखें मिलाते
तुम जीत जाते |
तुम सच को दफनाने की
करते रहे जुगत
सच को लील गए
झूठ को उगल दिया
सच दफनाने से रह गया
अब तो कब्रिस्तान में
उसके लिए बची नहीं है
कोई जगह |
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