परिंदा
आदमी से बेहतर है
वह कभी मंदिर पर
और कभी मस्जिद पर
(बैगैर किसी पूर्वाग्रह के)
मल त्याग करता है |
परिंदे की यह शरारत
आजतक किसी
दंगे का कारण नहीं बनी |
आदमी से बेहतर है
वह कभी मंदिर पर
और कभी मस्जिद पर
(बैगैर किसी पूर्वाग्रह के)
मल त्याग करता है |
परिंदे की यह शरारत
आजतक किसी
दंगे का कारण नहीं बनी |
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