Tuesday, 9 April 2013

यह कैसी आज़ादी पाए ?
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आज़ादी के
पैसठ साल बाद भी
सभी को न मिल पायी रोटी
जितनी भी सरकारें आयीं
सब निकलीं निकम्मी और खोटी |
जिनके घर भरे हुए थे
और भर गए
जिनके कपड़े फटे हुए थे
चूहे उनको और कुतर गए |
यह कैसी आज़ादी पाए ?
जिनके पेट भरे हुए थे
उनके पेट और फूल गए
कड़ी मेहनत से जिनको
मिलता था एक निवाला
उनकी किस्मत में मानों
पत्थर पड़ गए    |
हम यह कैसी आज़ादी पाए ?

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