Wednesday, 2 April 2014

1)
ये बुद्धिजीवी हैं 
हमारा-आप का दिमाग खाते हैं
हाँ,ये सेक्युलर हैं 
जो भी सत्ता में आता है 
उसी के साथ जुड़ जाते हैं 
ये सिरफिरे नहीं हैं
हाँ, इनके सिरे ढूंढें नहीं मिलते |


2)
सुनो पहाड़
पत्थर ही बने रहो
वे देवता बनाकर
एक न एक दिन
तुम्हे मंदिर में बिठा देंगे


3)
लाल सलाम अब जंचता नहीं 
उनका काम भी अब लाल सलाम से चलता नहीं 

कम्युनिस्टों को श्वेत सलाम 

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