1)
मेरे तुम्हारे बीच
कुछ तो था
क्या था जो बचा हुआ है
आज भी मरा नहीं
पुराना जख्म है
जो आज तक भरा नहीं
क्या कुछ नहीं था मेरे तुम्हारे बीच ?
2)
पुराने लौट आते हैं
तो बहुत दिक्कत होती है
नए हो चुके होते हैं पुराने
और पुराने नये नये से लगते हैं
3)
किसी के होने और न होने में है बहुत फर्क,
किसी के न होने पर ही हम महसूस पाते हैं उसके होने का अर्थ
कभी होना अच्छा लगता है, कभी न होना अच्छा लगता है
होना और न होना क्रमवार घटते रहे
तो सफ़र कुछ और सुहाना लगता है
4)
शब्द सांप्रदायिक नहीं होते
शब्दों को जो अर्थ
हमारा शातिर दिमाग दे देता है
शब्द उसे वैसे-का-वैसा उम्र-भर ढोता है |
मेरे तुम्हारे बीच
कुछ तो था
क्या था जो बचा हुआ है
आज भी मरा नहीं
पुराना जख्म है
जो आज तक भरा नहीं
क्या कुछ नहीं था मेरे तुम्हारे बीच ?
2)
पुराने लौट आते हैं
तो बहुत दिक्कत होती है
नए हो चुके होते हैं पुराने
और पुराने नये नये से लगते हैं
3)
किसी के होने और न होने में है बहुत फर्क,
किसी के न होने पर ही हम महसूस पाते हैं उसके होने का अर्थ
कभी होना अच्छा लगता है, कभी न होना अच्छा लगता है
होना और न होना क्रमवार घटते रहे
तो सफ़र कुछ और सुहाना लगता है
4)
शब्द सांप्रदायिक नहीं होते
शब्दों को जो अर्थ
हमारा शातिर दिमाग दे देता है
शब्द उसे वैसे-का-वैसा उम्र-भर ढोता है |
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