Sunday, 7 February 2016

मेरी तो बिसात क्या , दरक तो पहाड़ भी जाते हैं |



तानाशाही हो या हो प्रजातंत्र 
सत्ता की चाल और चरित्र नहीं बदलता 
तानाशाह को किसी आड़ की जरूरत नहीं होती 
और प्रजातंत्र में बन्दूक का इस्तेमाल सविंधान की आड़ में होता है |

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