आपातकाल १९७५ के दौरान लिखी गयी
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रानी ने
फरमान जारी कर दिया कि
उसकी सल्तनत की रियाया
अब बोलेगी नहीं
किसी भी बात पर अपना मुहं खोलेगी नहीं ।
उसने कहा और
फरमान लागू हो गया
कानून की शक्ल में
पेड़ जड़ों की गहराई नाप रहा है |
रानी का विश्वास है कि
मुल्क के लोग
लाठी और गोली की भाषा समझते हैं
उसका हर कानून
लाठी है या गोली है
रानी के शब्दों में--
जनता निगोड़ी है बहुत बोलती है |
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