ये हमारे देश की जनता है
हर बार पछताती है लेकिन गलतियां दोहराती है
मगरमच्छ उनकी इस आदत से भलीभांति परिचित है
वह जानता है कि
जब भी उन्हें प्यास लगेगी
वे अपनी प्यास बुझाने के लिए
अपनी आँखों में सुनहरी मछलियां लेकर
किसी तालाब पर ही तो जाएंगे
हर तालाब में एक मगरमच्छ बैठा है
वे भागकर अब कहाँ जाएंगे ?
हर बार पछताती है लेकिन गलतियां दोहराती है
मगरमच्छ उनकी इस आदत से भलीभांति परिचित है
वह जानता है कि
जब भी उन्हें प्यास लगेगी
वे अपनी प्यास बुझाने के लिए
अपनी आँखों में सुनहरी मछलियां लेकर
किसी तालाब पर ही तो जाएंगे
हर तालाब में एक मगरमच्छ बैठा है
वे भागकर अब कहाँ जाएंगे ?
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