जब मैं प्रेम में था
उसकी देह को कन्धों पर उठाकर
हर समय मस्त मैं झूमता था
उन्होनें न जाने कब
मेरे कन्धों से उसकी देह उतारकर
किसी अनजाने के कन्धों पर रख दी
और मेरे कन्धों पर
एक वैकल्पिक देह की व्यवस्था कर दी |
उसकी देह को कन्धों पर उठाकर
हर समय मस्त मैं झूमता था
उन्होनें न जाने कब
मेरे कन्धों से उसकी देह उतारकर
किसी अनजाने के कन्धों पर रख दी
और मेरे कन्धों पर
एक वैकल्पिक देह की व्यवस्था कर दी |
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